लोक सुरों, नृत्यों और रंगों से सराबोर हुआ लखनऊ का ‘देशज’

Anoop

December 6, 2025
  • सोनचिरैया के 15 साल पूरे होने पर लखनऊ में लोक संस्कृति का भव्य उत्सव
  • थेय्यम से लेकर गिद्धा तक, देशभर के लोक नृत्यों और संगीत की शानदार प्रस्तुतियां

लखनऊ। सोनचिरैया संस्था के 15वें वर्ष के अवसर पर शनिवार, 6 दिसम्बर को गोमतीनगर स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया पार्क में दो दिवसीय लोक कला उत्सव “देशज” के पांचवें संस्करण का भव्य शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. मांडवी सिंह ने कहा कि “देशज” जिस तरह देश की विविध लोक कलाओं को सामने ला रहा है, वह अत्यंत सराहनीय है और यह मंच कलाकारों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभा रहा है।

“देशज” की पहली संध्या राजस्थान के लोकप्रिय लोकगायक कुतले खान के नाम रही। उन्होंने विश्वप्रसिद्ध राजस्थानी मांड “केसरिया बालम” से अपनी प्रस्तुति की शुरुआत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके बाद “छाप तिलक सब छीनी” के माध्यम से सूफी रंग बिखेरा और फिर मांगनिया समुदाय का लोकप्रिय गीत “सावन आयो” प्रस्तुत कर समां बांध दिया। उनकी प्रस्तुतियों में की-बोर्ड पर अमोल डांगी, बैंजो पर सुधीर गन्धर्व, ढोलक पर गाजी खान, हारमोनियम पर चंपे खान तथा सह-गायन में दायम खान और सफी खान ने सहयोग किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ संस्था की अध्यक्ष पद्मश्री विद्या बिन्दु सिंह और पद्मश्री लोकगायिका मालिनी अवस्थी ने दीप प्रज्वलन कर किया। इसके बाद मालिनी अवस्थी ने “वंदे मातरम्” से देशज की शुरुआत की, जिसमें विभिन्न प्रदेशों के कलाकारों ने एक साथ प्रस्तुति देकर दर्शकों को देशभक्ति के रंग में सराबोर कर दिया। सोनचिरैया संस्था के ट्रस्टी व लेखक यतीन्द्र मिश्र ने संस्था के 15 वर्ष पूरे होने पर शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम की पहली प्रस्तुति केरल के प्रसिद्ध थेय्यम नृत्य से हुई, जो एक दिव्य अनुष्ठान माना जाता है। जयप्रभा मेनन के निर्देशन में चामुंडा थेय्यम और पुट्टम थेय्यम की भव्य प्रस्तुति में कलाकारों ने आकर्षक श्रृंगार, विशाल मुकुट और पारंपरिक रंगों के साथ देवी के उग्र स्वरूप को मंच पर सजीव किया।

इसके बाद राजस्थान का लोकप्रिय घूमर नृत्य प्रस्तुत किया गया। “रंगीलो राजस्थान” और “कदे आवो जी रंगीलो म्हारे देश” गीतों पर आधारित इस प्रस्तुति में अंजना कुमावत के नेतृत्व में 10 कलाकारों ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। प्रस्तुति के दौरान शहरवासी मंच के पास पहुंचकर पद्मश्री मालिनी अवस्थी व कलाकारों के साथ नृत्य का आनंद लेते नजर आए। गुजरात से आए कलाकारों ने डांगी नृत्य प्रस्तुत किया, जिसमें नई फसल और विवाह उत्सव की खुशियां दिखाई गईं। सुरेश पवार के नेतृत्व में 15 कलाकारों द्वारा किया गया पिरामिड प्रदर्शन विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। इसके बाद मिजोरम के चेराओं (बांस) नृत्य ने दर्शकों का ध्यान खींचा, जिसमें 16 कलाकारों ने बांस के बीच संतुलन व तालमेल के साथ नृत्य प्रस्तुत किया।

छत्तीसगढ़ से आए कलाकारों ने गोंडमारी नृत्य प्रस्तुत कर विवाह उत्सव का उल्लास दिखाया। तिरडूड वाद्य यंत्रों पर सजे इस नृत्य में 20 कलाकारों ने पारंपरिक सींगनुमा सेहरों के साथ मंच को जीवंत कर दिया। वहीं पंजाब की ओर से प्रस्तुत गिद्धा नृत्य ने दर्शकों का दिल जीत लिया। रवि कुनर के निर्देशन में 10 कलाकारों ने शादी से जुड़ी लोकपरंपराओं और हास्य-व्यंग्य से भरपूर प्रस्तुति दी।

कार्यक्रम के अंत में महाराष्ट्र का लोक नृत्य सांगी प्रस्तुत किया गया, जिसमें ढोल, पौड़ी और संबल वाद्य यंत्रों के माध्यम से होली का उल्लास दर्शाया गया। छेबिल दास विष्णु गौली के नेतृत्व में तीन कलाकारों ने यह प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में लोक एवं जनजाति संस्कृति संस्थान के निदेशक अतुल द्विवेदी, वरिष्ठ गायक पं. धर्मनाथ मिश्र सहित बड़ी संख्या में शहरवासियों ने उत्सव का आनंद लिया। “देशज” की अंतिम संध्या रविवार, 7 दिसम्बर को शाम चार बजे डॉ. राम मनोहर लोहिया पार्क, गोमतीनगर में आयोजित की जाएगी।

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