23वीं श्री बुद्धेश्वर धाम यात्रा पर 17 दिवसीय जनसंपर्क अभियान शुरू, सुंदरकांड पाठ के साथ उठी पुरोहित कल्याण बोर्ड और मंदिर सुरक्षा की माँग

Anoop

August 9, 2026

23वीं ‘बम-बम भोले श्री बुद्धेश्वर धाम यात्रा’ के पावन अवसर पर सामूहिक सुंदरकांड पाठ के साथ 17 दिवसीय जनसंपर्क अभियान का भव्य शुभारंभ हुआ

यात्रा संयोजक राजा दास और श्री मंगल बाबा के नेतृत्व में बसंत कुंज स्थित श्री शीतला माता मंदिर से इस श्रावण महाअनुष्ठान की शुरुआत की गई

लखनऊ23वीं ‘बम-बम भोले श्री बुद्धेश्वर धाम यात्रा’ के पावन अवसर पर राजधानी लखनऊ के विभिन्न मंदिरों और आश्रमों में सामूहिक सुंदरकांड के पाठ के साथ 17 दिवसीय व्यापक जनसंपर्क अभियान का भव्य शुभारंभ हुआ। यात्रा संयोजक जनसेवक राजा दास और श्री मंगल बाबा ने बताया कि श्रावण मास के इस महाअनुष्ठान की शुरुआत बसंत कुंज (पीर नगर) स्थित श्री शीतला माता मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा सुंदरकांड के भक्तिमय पाठ के साथ की गई। इस पावन अवसर पर क्षेत्र के प्रमुख संतों, गणमान्य नागरिकों और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की गरिमामयी उपस्थिति रही।

आयोजन में मुख्य रूप से स्वतंत्र कुमार त्रिपाठी (बरावन कला), हरि ओम श्रीवास्तव, कमलेश शुक्ला, संजय शुक्ला, गुड्डू बाबा, पारस भारती, भौकाली बाबा (संत सेवक), प्रमोद ड्राइवर, गोपी बाबा, अमलेश मिश्रा, प्रशांत मिश्रा और प्रतीक श्रीवास्तव सहित अनेक सेवादार मौजूद रहे।

मंदिरों की सुरक्षा और पुरोहितों के कल्याण का संकल्प

यात्रा के मुख्य आयोजक राजा दास ने अभियान के संकल्पों और माँगों को रेखांकित करते हुए कहा कि उनका मुख्य उद्देश्य प्रदेश और देश में मंदिरों व संत-महात्माओं की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित करना, पुरोहित कल्याण बोर्ड का गठन करना, संतों व पुरोहितों के लिए पेंशन योजना लागू करना तथा मंदिरों को अवैध कब्जों से मुक्त कराना है।

उन्होंने उत्तर प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी से विशेष अपील करते हुए माँग की कि उनके मार्गदर्शन व आशीर्वाद से संत-महात्माओं और पुरोहितों के लिए सुरक्षा और सहयोग की यह व्यवस्था पूरे देश में लागू की जाए, ताकि हमारी सनातन संस्कृति और उसके संरक्षकों का मान-सम्मान सुरक्षित रह सके।

शामिल होंगी विभिन्न क्षेत्रों की विभूतियां

यात्रा के वरिष्ठ संयोजक मंगल बाबा ने बताया कि यात्रा में लखनऊ ही नहीं प्रदेशभर से विभिन्न तबकों की प्रतिष्ठित विभूतियां शामिल होतीं हैं। यात्रा के इस 23वें वर्ष में भी चाहे वो कला संस्कृति, साहित्य जगत, राजनैतिक, शिक्षक, छात्र-छात्राएं और बड़ी संख्या में महिला श्रद्धालु शामिल होंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *