मेरठ में ‘नीला ड्रम हत्याकांड’ की खौफनाक यादें ताजा, पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर भी रह गए थे दंग; 54 दिन में दाखिल हुई थी चार्जशीट

Anoop

October 15, 2026

पोस्टमार्टम टीम और तत्कालीन विवेचक ने साझा कीं ‘नीले ड्रम’ हत्याकांड की खौफनाक यादें

 शव निकालने में लगा था एक घंटा, महज 54 दिन में पूरी हुई थी चार्जशीट दाखिल करने की प्रक्रिया

मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ में चर्चित ‘सौरभ राजपूत हत्याकांड’ (जो नीला ड्रम केस के नाम से जाना जाता है) में अदालत का फैसला आने के बाद इस खौफनाक वारदात से जुड़ी पुरानी यादें फिर ताजा हो गई हैं। इस सनसनीखेज मामले के पोस्टमार्टम से जुड़े डॉक्टरों और विवेचना करने वाले पुलिस अधिकारियों ने उस भयावह मंजर को याद किया है, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था।

ड्रम से शव निकालने में लगा था करीब एक घंटा लगा। मामले की तहकीकात और पोस्टमार्टम से जुड़े चिकित्सीय दल के मुताबिक, मेडिकल कॉलेज की मॉर्चरी में हर साल हजारों पोस्टमार्टम होते हैं, इसके बावजूद सौरभ राजपूत का यह मामला उनके लिए बेहद विचलित करने वाला था।

  • हत्या का खौफनाक तरीका: हत्यारों ने शव को एक नीले ड्रम में ठूंसकर भरने के बाद उसमें डस्ट और सीमेंट भर दिया था। इसके ऊपर से पानी डालने के कारण सीमेंट पूरी तरह जम गया था और शव उसके बीच में बुरी तरह फंस गया था।
  • पोस्टमार्टम की प्रक्रिया: शव तक हवा न पहुंचने के कारण सामान्य सड़न और दुर्गंध तो कम थी, लेकिन कटर से ड्रम काटकर और जमे हुए सीमेंट को हटाकर शव को बाहर निकालने में चिकित्सीय टीम को करीब एक घंटे का समय लग गया था। शव की स्थिति देखकर अनुभवी डॉक्टर भी हैरान रह गए थे।

दिल पर चाकू के ताबड़तोड़ वार और शरीर के कटे हिस्से पोस्टमार्टम रिपोर्ट और टीम के खुलासे के अनुसार:

  • सौरभ की गर्दन को धड़ से पूरी तरह अलग कर दिया गया था और दोनों हाथ कलाइयों के पास से काट दिए गए थे।
  • ड्रम में शव को फिट करने के लिए उसके पैरों को पीछे की ओर मोड़ दिया गया था, जो कड़ाई के कारण इतने सख्त हो चुके थे कि उन्हें सीधा नहीं किया जा सकता था।
  • मृतक के दिल पर चाकू से तीन गहरे वार किए गए थे, जो भीतर तक धंसे हुए थे। करीब डेढ़ घंटे तक चले इस पोस्टमार्टम के बाद इस वीभत्स घटना की तस्वीरें कई दिनों तक डॉक्टरों के जेहन में घूमती रही थीं।

पुलिस की मुस्तैदी: महज 54 दिन में दाखिल हुई थी चार्जशीट इस बहुचर्चित हत्याकांड की विवेचना तत्कालीन ब्रह्मपुरी इंस्पेक्टर रमाकांत पचौरी (वर्तमान में क्राइम ब्रांच) ने की थी। उन्होंने बताया कि तत्कालीन एसएसपी विपिन ताडा ने इस मामले में कड़े निर्देश देते हुए कम समय में चार्जशीट दाखिल करने को कहा था। पुलिस टीम ने तेजी से साक्ष्य जुटाए, गवाहों के बयान दर्ज किए और तमाम कानूनी प्रक्रियाएं पूरी करते हुए महज 54 दिन के भीतर अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी थी। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि पुख्ता साक्ष्यों के आधार पर की गई इस कार्रवाई से न्याय का मार्ग प्रशस्त हुआ।

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