70वीं बरसी पर खामोशी ने सुनाई ‘मजाज़’ की शायरी, जब नज़्म में ढल गई स्मृतियाँ, भीग उठीं आँखें
निशातगंज कब्रिस्तान में उमड़ा अदब का कारवां, फातिहा ख्वानी व दी गई श्रद्धांजलि रोमांस और इंक़िलाब की जिन्दा आवाज़ आज भी दिलों में गूंज रही है लखनऊ। इश्क़, इंक़िलाब और…
