लोक संस्कृति के महानायक और आदिशक्ति जगदम्बा पर हुआ विशिष्ट व्याख्यान, शोधग्रंथ ‘नवनीत’ का लोकार्पण

Anoop

October 31, 2026

लोक संस्कृति के महानायक और आदिशक्ति जगदम्बा पर हुआ विशिष्ट व्याख्यान

मुख्य वक्ता डॉ. सूर्यप्रकाश शुक्ल के शोधग्रंथ ‘नवनीत’ का हुआ भव्य लोकार्पण

लखनऊ।अखिल भारतीय संस्कृत परिषद्, लखनऊ के प्रांगण में “लोक संस्कृति के महानायक मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम और आदिशक्ति जगदम्बा” विषय पर एक विशिष्ट व्याख्यान एवं पुस्तक लोकार्पण समारोह का आयोजन किया गया। इस गरिमामयी कार्यक्रम में श्रीगुरुगोविन्दसिंहजी महाराज राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, पलियाकलां, लखीमपुर खीरी के प्राचार्य एवं प्रख्यात संस्कृत मर्मज्ञ डॉ. सूर्यप्रकाश शुक्ल ने मुख्य वक्ता के रूप में सहभागिता की। अपने मुख्य वक्तव्य में उन्होंने बताया कि भारतीय लोक संस्कृति में भगवान श्रीराम जहाँ मर्यादा, सत्य, त्याग, करुणा और आदर्श जीवन-मूल्यों के प्रतीक हैं, वहीं आदिशक्ति जगदम्बा सृजन, शक्ति, संरक्षण और नारी चेतना की अधिष्ठात्री मातृदेवी हैं।

कार्यक्रम के दौरान मुख्य वक्ता डॉ. सूर्यप्रकाश शुक्ल द्वारा रचित शोधग्रंथ ‘नवनीत’ का लोकार्पण भी किया गया। समारोह के मुख्य अतिथि प्रो. रामसुमेर यादव (पूर्व अध्यक्ष, संस्कृत विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय) तथा सारस्वत अतिथि प्रो. हरिशंकर मिश्र (पूर्व आचार्य, हिंदी विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय) ने प्रस्तुत विषय पर अपने सारगर्भित विचार रखे। कार्यक्रम में अखिल भारतीय संस्कृत परिषद् के मन्त्री प्रो. प्रयाग नारायण मिश्र ने स्वागत उद्बोधन के साथ विषय का प्रवर्तन किया। इस अवसर पर संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रो. अभिमन्यु सिंह, डॉ. अशोक कुमार शतपथी, डॉ. गौरव सिंह, डॉ. कुसुम सिंह, डॉ. रेखा शुक्ला, प्रो. वन्दना द्विवेदी, डॉ. आनन्द दीक्षित और डॉ. नीलम पाण्डेय की विशेष उपस्थिति रही।

कार्यक्रम की अध्यक्षता परिषद् के उपाध्यक्ष डॉ. रविकिशोर त्रिवेदी ने की, जिन्होंने भारतीय संस्कृति में श्रीराम और आदिशक्ति जगदम्बा के अस्तित्व के वैशिष्ट्य पर विशेष प्रकाश डाला। आज के कार्यक्रम का संचालन अखिल भारतीय संस्कृत परिषद् के संयुक्त मंत्री डॉ. अनिल कुमार पोरवाल ने किया, जबकि संयोजिका की भूमिका डॉ. पत्रिका जैन ने निभाई। कार्यक्रम में धन्यवाद ज्ञापन लखनऊ विश्वविद्यालय के संस्कृत-प्राकृत भाषा विभाग के अध्यक्ष प्रो. अभिमन्यु सिंह ने किया। कार्यक्रम का वैदिक मंगलाचरण मुकेश कुमार ने, लौकिक मंगलाचरण सिंधु पटेल ने, स्वागत गीत कीर्ति तथा समरीता यादव ने, और शांतिपाठ प्रभव पाण्डेय द्वारा समवेत स्वर में प्रस्तुत किया गया। इस आयोजन में अनेक विद्वान् तथा ज्योतिष एवं संस्कृत विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय के शोध छात्रों सहित पचास से अधिक श्रोता उपस्थित रहे।इन महान सांस्कृतिक प्रतीकों के जीवन-मूल्यों को आत्मसात कर नई पीढ़ी तक पहुँचाने तथा भारतीय लोक संस्कृति की समृद्ध विरासत का संरक्षण एवं संवर्धन करने की आवश्यकता है।

कार्यक्रम के दौरान मुख्य वक्ता डॉ. सूर्यप्रकाश शुक्ल द्वारा रचित शोधग्रंथ ‘नवनीत’ का लोकार्पण भी किया गया। समारोह के मुख्य अतिथि प्रो. रामसुमेर यादव (पूर्व अध्यक्ष, संस्कृत विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय) तथा सारस्वत अतिथि प्रो. हरिशंकर मिश्र (पूर्व आचार्य, हिंदी विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय) ने प्रस्तुत विषय पर सारगर्भित वक्तव्य दिए। कार्यक्रम में अखिल भारतीय संस्कृत परिषद् के मन्त्री प्रो. प्रयाग नारायण मिश्र ने वाचिक स्वागत करते हुए सारगर्भित स्वरूप में विषय का प्रवर्तन किया। इस अवसर पर संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रो. अभिमन्यु सिंह, डॉ. अशोक कुमार शतपथी, डॉ. गौरव सिंह, डॉ. कुसुम सिंह, डॉ. रेखा शुक्ला, प्रो. वन्दना द्विवेदी, डॉ. आनन्द दीक्षित, डॉ. नीलम पाण्डेय की विशेष उपस्थिति रही।

कार्यक्रम की अध्यक्षता परिषद् के उपाध्यक्ष डॉ. रविकिशोर त्रिवेदी ने की, जिन्होंने भारतीय संस्कृति में श्रीराम और आदिशक्ति जगदम्बा के अस्तित्व के वैशिष्ट्य पर विशेष प्रकाश डाला। आज के कार्यक्रम का संचालन अखिल भारतीय संस्कृत परिषद् के संयुक्त मंत्री डॉ. अनिल कुमार पोरवाल ने किया, जबकि संयोजिका की भूमिका डॉ. पत्रिका जैन ने निभाई। कार्यक्रम में धन्यवाद ज्ञापन लखनऊ विश्वविद्यालय के संस्कृत-प्राकृत भाषा विभाग के अध्यक्ष प्रो. अभिमन्यु सिंह ने किया। कार्यक्रम का वैदिक मंगलाचरण मुकेश कुमार ने, लौकिक मंगलाचरण सिंधु पटेल ने, स्वागत गीत कीर्ति तथा समरीता यादव ने, और शांतिपाठ प्रभव पाण्डेय द्वारा समवेत स्वर में प्रस्तुत किया गया। इस आयोजन में अनेक विद्वान् तथा ज्योतिष एवं संस्कृत विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय के शोध छात्रों सहित पचास से अधिक श्रोता उपस्थित रहे।

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