हरिनाम संकीर्तन व ‘मुकुंदा रॉक बैंड’ की संगीतमय प्रस्तुति पर झूमे श्रद्धालु
इस्कॉन लखनऊ केश्री श्री राधा रमण बिहारी जी मंदिर में दो दिवसीय “गीता रसामृतम-2”
लखनऊ। इस्कॉन, लखनऊ के शहीद पथ स्थित श्री श्री राधा रमण बिहारी जी मंदिर परिसर में आयोजित दो दिवसीय श्रीमद भगवत गीता ज्ञान महोत्सव “गीता रसामृतम-2” के द्वितीय एवं अंतिम दिवस का शुभारम्भ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत मंदिर अध्यक्ष अपरिमेय श्याम प्रभुजी, इस्कॉन गर्ल्स फोरम की निदेशिका अचिन्त्य रूपिणी माताजी, डीजीपी साइबर क्राइम वी.के. सिंह, उनकी धर्मपत्नी पुनीता सिंह माताजी, राहुल चंदानी प्रभुजी एवं अन्य वरिष्ठ भक्तों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर की।

परम पुरुषोत्तम भगवान श्रीकृष्ण और आध्यात्मिक सिद्धांतों का मर्म
कथा व्यास एवं मंदिर अध्यक्ष अपरिमेय श्याम प्रभु जी ने प्रवचन में बताया कि सनातन धर्म में पूजित देवी-देवताओं में परम पुरुषोत्तम भगवान श्रीकृष्ण ही सर्वोपरि मूल हैं। उन्होंने आध्यात्मिक दृष्टिकोण स्पष्ट करते हुए कहा कि अच्छे लोगों के साथ बुरा और बुरे लोगों के साथ अच्छा केवल तब तक ही प्रतीत होता है, जब तक व्यक्ति के पिछले पुण्य उसके साथ रहते हैं।
उन्होंने आगे बताया कि भगवान श्रीकृष्ण छह ऐश्वर्यों—पूर्ण ज्ञान, सौंदर्य, बल, धन, यश और वैराग्य से परिपूर्ण हैं, जो सभी को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। कथा के दौरान उन्होंने मुख्य रूप से तीन विषयों—“न चाहते हुए भी हम दुःखी क्यों होते हैं?”, “बुरे लोगों को तुरंत दंड क्यों नहीं मिलता?” एवं “बुरी घटनाएं अच्छे लोगों के साथ क्यों घटती हैं?”—पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने सूर्य का उदाहरण देते हुए समझाया कि जिस तरह सूर्य एक ही है लेकिन अलग-अलग भाषाओं में उसके नाम भिन्न हैं, ठीक उसी तरह परम ईश्वर भी एक ही हैं, जिन्हें विभिन्न धर्मों और संस्कृतियों में अलग-अलग नामों से पुकारा जाता है।

हरिनाम संकीर्तन, मुकुंदा रॉक बैंड की प्रस्तुति और महाप्रसाद
महोत्सव के दौरान गृहस्थ भक्तों द्वारा आनंदमयी हरिनाम संकीर्तन और ‘मुकुंदा रॉक बैंड’ की दिव्य संगीतमय प्रस्तुति दी गई, जिस पर हजारों श्रद्धालु उत्साह के साथ झूमते और नृत्य करते दिखे। पूरा पंडाल परिसर “हरे कृष्ण” महामंत्र की दिव्य ध्वनि से गुंजायमान रहा। इस ज्ञान महाकुंभ में लखनऊ और आसपास के क्षेत्रों से पहुंचे हजारों गणमान्य श्रद्धालुओं ने सहभागिता की और कार्यक्रम के अंत में स्वादिष्ट भोजन प्रसाद (भंडारे) का आनंद ग्रहण किया।

