लखनऊ के इको गार्डन में 28वें दिन भी अनवरत जारी रहा CHO का धरना, गूंजीं मांगें
ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं का मुख्य आधार हैं CHO, 4600 ग्रेड पे व नियमितीकरण की मांग तेज
लखनऊ। राजधानी के इको गार्डन में उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से पहुंचे सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (CHO) का धरना-प्रदर्शन रविवार को 28वें दिन भी पूरी ऊर्जा के साथ जारी रहा। संयुक्त मोर्चा CHO उत्तर प्रदेश के बैनर तले चल रहे इस आंदोलन में प्रदेशभर से भारी संख्या में स्वास्थ्य अधिकारी हिस्सा ले रहे हैं, जिसमें महिला CHO की उपस्थिति विशेष रूप से उल्लेखनीय है। प्रदर्शनकारियों के नारों से इको गार्डन का इलाका गूंज उठा और वे सरकार से अपनी तीन सूत्रीय मांगों पर तत्काल ठोस निर्णय लेने की मांग कर रहे हैं।
ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ हैं CHO
आंदोलनकारियों का कहना है कि वे राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अंतर्गत आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के माध्यम से ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में लगातार प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं दे रहे हैं। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, गैर-संचारी रोग (NCD), टेली-कंसल्टेशन, मानसिक स्वास्थ्य और सरकार के विभिन्न 27 प्रकार के राष्ट्रीय स्वास्थ्य पोर्टलों व कार्यक्रमों का संचालन करने में CHO अहम भूमिका निभा रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें अपनी जायज मांगों के लिए सड़कों पर उतरने को विवश होना पड़ रहा है। इतने दिनों से धरना जारी रहने के बावजूद अभी तक शासन स्तर से किसी ठोस वार्ता या समाधान की पहल न होने से कर्मियों में गहरा रोष व्याप्त है।
प्रमुख मांगें और केंद्रीय दिशा-निर्देश
- पृथक कैडर और नियमितीकरण: भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय और NHM के पूर्व पत्राचारों का हवाला देते हुए CHO के लिए पृथक कैडर बनाने और नियमितीकरण के लिए प्रमुख सचिव स्तर से लिखित आदेश जारी किए जाएं।
- वेतन विसंगति दूर करना और PBI मर्जर: वेतन में मौजूद लगभग 5000 रुपये की विसंगति को समाप्त करते हुए परफॉर्मेंस बेस्ड इंसेंटिव (PBI) को मूल वेतन में मर्ज किया जाए और AB-HWC गाइडलाइन के अनुसार समान वेतन लागू हो।
- हरियाणा की तर्ज पर लाभ: हरियाणा राज्य की तर्ज पर उत्तर प्रदेश के CHO को भी 4600 ग्रेड पे, महंगाई भत्ता (DA) और मकान किराया भत्ता (HRA) जैसी सुविधाएं दी जाएं।
संयुक्त मोर्चा के नेताओं ने चेतावनी दी है कि जब तक सरकार समयबद्ध वार्ता कर इन मांगों पर लिखित और सकारात्मक निर्णय नहीं लेती, तब तक यह आंदोलन इसी प्रकार अनवरत जारी रहेगा।

