राजनैतिक मैदान में उतरने का कारण और 2027 के विधानसभा चुनाव का एजेंडा
मतदाता सूची और सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासनिक व्यवस्था पर तीखे सवाल
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया अध्याय जुड़ गया है। पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने अपनी नई राजनीतिक पार्टी ‘जननीति भारत’ के गठन का ऐलान कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि उनकी पार्टी आगामी 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में पूरे दमखम से उतरेगी और वह खुद मिर्जापुर जिले की सदर विधानसभा सीट से चुनावी मैदान में उतरेंगी।
दिव्या मित्तल ने सोशल मीडिया के माध्यम से जनता से मुखातिब होते हुए कहा कि उनका मुख्य उद्देश्य केवल राजनेताओं के चेहरों को बदलना नहीं, बल्कि पूरी राजनीतिक व्यवस्था में सुधार करना है। उन्होंने जोर दिया कि ‘जननीति भारत’ में असली राज जनता का होना चाहिए और सरकारें जनता की आकांक्षाओं के अनुरूप चलनी चाहिए। उन्होंने यह भी साफ किया कि वह किसी अन्य पार्टी से जुड़ने के बजाय स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ेंगी और उन्हें इस लड़ाई के लिए बाहुबल या पैसे की नहीं, बल्कि जनसमर्थन की जरूरत है।
अपने संबोधन के दौरान दिव्या मित्तल ने प्रशासनिक और व्यवस्थागत मुद्दों पर भी तीखे सवाल उठाए।
- मतदाता सूची: उन्होंने मतदाता सूची से जुड़े नियमों और प्रकियाओं पर सवाल खड़े करते हुए फॉर्म-7 और दस्तावेजों की मांग पर पुनर्विचार करने की बात कही।
- स्वास्थ्य सेवाएं: सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को आड़े हाथों लेते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को कमजोर किया जा रहा है, जबकि दूसरी ओर धड़ल्ले से निजी नर्सिंग होम के पंजीकरण हो रहे हैं। उन्होंने इसे सरकारी व्यवस्था को कमजोर करने की साजिश बताया।
श्रद्धा दुबे मामले पर भी दी प्रतिक्रिया चर्चा में आए शिव शर्मा और श्रद्धा दुबे प्रकरण को लेकर भी दिव्या मित्तल ने अपनी बात रखी। उन्होंने महात्मा गांधी के सिद्धांतों का हवाला देते हुए कहा कि उनकी जानकारी के मुताबिक यह मामला वैसा नहीं है जैसा कि दिखाया जा रहा है। साथ ही उन्होंने इस मामले में मुख्यमंत्री के संज्ञान लेने को लेकर भी टिप्पणी की।
आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पूर्व आईएएस अधिकारी द्वारा खड़ी की जा रही इस नई पार्टी और उनके इन तीखे तेवरों से यूपी की सियासत में पारा चढ़ने के आसार हैं।

