चुनावी तैयारियों के बीच परीक्षाओं की घोषणा, तारीखें न टकराने पर दिया जा रहा जोर
पांचों राज्यों में एक साथ चुनाव कराने की बाध्यता, मार्च से पहले मतदान संभव
लखनऊ। उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर सुगबुघाट तेज हो गई है। राज्य में बोर्ड परीक्षाओं की तारीखों की घोषणा के बाद अब यह अनुमान लगाया जा रहा है कि मतदान बोर्ड परीक्षाओं के ठीक बाद कराए जा सकते हैं।
उत्तर प्रदेश सहित पांच राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल समाप्त होने से पहले चुनाव कराना संवैधानिक अनिवार्यता है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि सभी विधानसभा चुनाव अपने निर्धारित समय पर ही आयोजित होंगे। चूंकि फरवरी में यूपी बोर्ड की परीक्षाएं आयोजित होनी हैं, इसलिए दोनों बड़े आयोजनों को एक साथ संचालित करना निर्वाचन आयोग के लिए चुनौती होगा। इसी कारण माना जा रहा है कि यूपी में चुनावी प्रक्रिया बोर्ड परीक्षाओं के बाद संपन्न कराई जा सकती है।
मई 2027 में समाप्त हो रहा यूपी विधानसभा का कार्यकाल
उत्तर प्रदेश विधानसभा का वर्तमान कार्यकाल 22 मई 2027 को पूरा हो रहा है। वहीं, माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा यूपी बोर्ड की परीक्षाएं 5 फरवरी से 24 फरवरी 2027 के बीच आयोजित की जानी हैं। इसे ध्यान में रखते हुए अनुमान जताया जा रहा था कि चुनाव मार्च या अप्रैल में कराए जा सकते हैं। हालांकि, आयोग से जुड़े जानकारों का मानना है कि वर्ष 2022 की तर्ज पर इस बार भी सभी पांचों राज्यों के चुनाव एक साथ ही संपन्न होंगे।
मणिपुर, पंजाब, गोवा और उत्तराखंड विधानसभाओं का कार्यकाल क्रमशः 13, 16, 14 और 28 मार्च को समाप्त हो रहा है। ऐसे में चुनाव आयोग द्वारा उत्तर प्रदेश का चुनाव अलग कराने की संभावना न के बराबर है। इसलिए पांचों राज्यों के चुनाव 13 मार्च से पहले संपन्न कराना संवैधानिक बाध्यता होगी।
माध्यमिक शिक्षा विभाग का रुख: नहीं टकराएंगी तिथियां
माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, परीक्षा की तिथियों का निर्धारण उच्च स्तर पर विचार-विमर्श के बाद ही किया गया है। इसलिए चुनाव आयोग अपना चुनावी कार्यक्रम इस प्रकार जारी करेगा कि परीक्षा और मतदान की तारीखें आपस में न टकराएं।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2022 के विधानसभा चुनावों के दौरान राज्य में 8 जनवरी को आचार संहिता लागू हुई थी और 10 फरवरी से 7 मार्च के बीच सात चरणों में मतदान संपन्न हुआ था। इस बार भी चुनावी कार्यक्रम इसी प्रकार के पैटर्न पर रहने की उम्मीद जताई जा रही है।

