उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान में 14 सितम्बर को ‘हिन्दी दिवस समारोह’ बड़ी धूमधाम से आयोजित किया गया
कार्यक्रम में मेधावी युवाओं को सम्मानित करने के साथ-साथ डिजिटल दौर में हिन्दी के बढ़ते प्रभाव पर चर्चा हुई
लखनऊ। उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान में 14 सितम्बर को ‘हिन्दी दिवस समारोह’ बड़ी धूमधाम से मनाया गया। कार्यक्रम का आयोजन हिन्दी भवन के निराला सभागार में सुबह 11 बजे किया गया। समारोह की शुरुआत माँ सरस्वती की मूर्ति पर फूल चढ़ाने, दीप जलाने और सरोज खुल्बे जी की सुरीली वाणी वंदना के साथ हुई। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पधारे जाने-माने साहित्यकार और संस्थान के पूर्व निदेशक डॉ० सुधाकर अदीब का संस्थान की प्रधान सम्पादक डॉ० अमिता दुबे ने अंगवस्त्र (उत्तरीय) और स्मृति चिह्न देकर स्वागत किया।
समारोह का मुख्य आकर्षण वर्ष 2025 की कहानी, कविता और निबन्ध प्रतियोगिताओं के विजेता रहे। राज्य के अलग-अलग जिलों से आए मेधावी युवाओं को अंगवस्त्र और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वालों में वाराणसी की सुनीता कुमारी, हाथरस के माधव शर्मा, गाजीपुर की श्रेया यादव, लखनऊ के कुश रजवार, देवरिया के योगेन्द्र पाण्डेय, अयोध्या की रतनमाला भारती, कुशीनगर के विवेक प्रताप मद्धेशिया, गाजीपुर की शिवांगी यादव, लखनऊ की दानिया इदरीसी, शाहजहाँपुर के सृजन पाण्डेय, सम्भल के यशवीर सिंह और लखनऊ की सुकीर्ति वर्मा शामिल रहे।
मुख्य अतिथि डॉ० सुधाकर अदीब ने कहा कि आज पूरी दुनिया में हिन्दी का बोलबाला बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि डिजिटल और इंटरनेट के इस दौर में हिन्दी भाषा और भी ज्यादा वैज्ञानिक, आसान और उपयोगी साबित हो रही है। समारोह में प्रसिद्ध लेखक डॉ० रामकुमार वर्मा के लिखे नाटकों (एकांकी)— ‘पृथ्वीराज की आँखें’, ‘मालिक के मालिक की सेवा’ और ‘बादल की मृत्यु’ की सुंदर प्रस्तुति दी गई। आचार्य रामचन्द्र शुक्ल पुस्तकालय की शोध छात्रा श्वेता जायसवाल, अनमोल शर्मा, सौम्या मिश्रा और डॉ० सरिता गिरि ने इन नाटकों का पाठ किया।
पूरे कार्यक्रम का संचालन प्रधान सम्पादक डॉ० अमिता दुबे ने किया। अंत में उन्होंने कार्यक्रम में आए सभी लेखकों, विद्वानों, छात्रों और मीडिया के साथियों का दिल से धन्यवाद किया।

