मेजर ध्यानचंद के बेटे और पूर्व अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी राजकुमार सिंह का 81 वर्ष की उम्र में झांसी में निधन हो गया
निधन से दो दिन पहले ही उनके भाई अशोक ध्यानचंद ने 52 साल पुराना उनके विवाह का पत्र साझा किया था, अजीब संयोग बताया
झांसी। हॉकी के महान जादूगर मेजर ध्यानचंद के तीसरे पुत्र और पूर्व अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी राजकुमार सिंह (81) का रविवार को झांसी के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वह लंबे समय से अर्थराइटिस की बीमारी से पीड़ित थे। शनिवार को तबीयत बिगड़ने पर उन्हें भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। रविवार शाम नंदनपुरा मुक्तिधाम में उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनके निधन से खेल जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।
राजकुमार सिंह स्वयं एक बेहतरीन हॉकी खिलाड़ी थे। उन्होंने 1970 के बैंकाक एशियाई खेलों में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया था और 1986 में लंदन में आयोजित वेटरन हॉकी विश्व कप में भी हिस्सा लिया। इसके अलावा उन्होंने देश के लिए कई अंतरराष्ट्रीय टेस्ट मैच खेले और 15 बार राष्ट्रीय चैंपियनशिप में रेलवे का प्रतिनिधित्व किया। वह कोलकाता के ऐतिहासिक क्लब मोहन बागान से भी लंबे समय तक जुड़े रहे। उन्होंने वर्ष 1967 में ईस्टर्न रेलवे से अपनी सेवा शुरू की थी और सेंट्रल रेलवे से स्पोर्ट्स ऑफिसर के पद से सेवानिवृत्त हुए।
राजकुमार सिंह के निधन से एक अत्यंत भावुक और अजीब संयोग जुड़ गया है। उनके निधन से ठीक दो दिन पहले, 11 सितंबर को उनके छोटे भाई और पूर्व ऑलंपियन अशोक ध्यानचंद ने सोशल मीडिया पर 52 साल पुराना एक पत्र साझा किया था। 11 जून 1974 को मेजर ध्यानचंद द्वारा जबलपुर के एक पूर्व आईपीएस अधिकारी को लिखा गया यह पत्र राजकुमार सिंह के विवाह की तैयारियों और निमंत्रण से जुड़ा था।
पत्र साझा करने के दो दिन बाद ही भाई के चले जाने पर अशोक ध्यानचंद ने अत्यंत भावुक होकर लिखा, “कुछ अजीब सी बात है या… टेलीपेथी… दुखद।” अशोक ध्यानचंद ने याद करते हुए बताया कि राजकुमार सिंह ही उन्हें पहली बार कोलकाता ले गए थे, जहां से उन्होंने हॉकी खेलना सीखा। जिस भाई के साथ जुड़ी पुरानी यादों का पत्र दो दिन पहले साझा किया गया था, उसी भाई के हमेशा के लिए चले जाने से यह प्रसंग पूरे खेल जगत और प्रशंसकों को भावुक कर गया है।

