कवि- समीक्षक अशोक वाजपेयी को उनके योगदान के लिए ‘राही मासूम रज़ा साहित्य सम्मान’ से नवाजा गया
वाजपेयी ने कहा कि आज समाज में नफ़रत और भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ असहयोग व सत्याग्रह का रास्ता अपनाना चाहिए
लखनऊ: जाने-माने कवि और साहित्य समीक्षक अशोक वाजपेयी को ऑल इंडिया कैफ़ी आज़मी अकादमी में हिंदी साहित्य और साहित्यिक संस्कृति में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए ‘राही मासूम रज़ा साहित्य सम्मान’ प्रदान किया गया। अकादमी की डायरेक्टर वंदना मिश्रा ने प्रसिद्ध कवि नरेश सक्सेना, लेखिका नमिता सिंह और अकादमी के ट्रस्टी प्रोफ़ेसर नदीम हसनैन की उपस्थिति में उन्हें इस सम्मान से नवाजा।
सम्मान समारोह में अशोक वाजपेयी ने “साये की तरह अजब वक़्त पड़ा है” विषय पर अपना वक्तव्य प्रस्तुत किया। अपने व्याख्यान में उन्होंने वर्तमान समय को गहरी उदासी और निराशा का दौर करार दिया। उन्होंने सरकारों की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि मौजूदा नीतियां अल्पसंख्यकों और दलितों के हितों के विपरीत हैं। देश में इन वर्गों के खिलाफ नफरत का माहौल बनाया जा रहा है और उन्हें कानूनी प्रक्रियाओं के जरिए निशाना बनाया जा रहा है।
शैक्षणिक संस्थानों की गिरती स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि समाज तेजी से भ्रष्टाचार और विद्वेष की गिरफ्त में आ रहा है, जिसे रोकना अत्यंत आवश्यक है। इस स्थिति से निपटने के लिए उन्होंने महात्मा गांधी के विचारों को आधुनिक संदर्भ में अपनाने पर जोर दिया। वाजपेयी के अनुसार, आज के समय में झूठ, ईर्ष्या और नफरत के खिलाफ ‘असहयोग’, सामाजिक बुराइयों व डराने-धमकाने की राजनीति के खिलाफ ‘सत्याग्रह’ और शासन-प्रशासन की जवाबदेही तय करने के लिए ‘सविनय अवज्ञा’ को एक मजबूत हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

समारोह के दौरान लेखिका अवंतिका सिंह ने अशोक वाजपेयी के व्यक्तित्व से जुड़ा एक दिलचस्प तथ्य साझा करते हुए बताया कि कई उत्कृष्ट पुस्तकें लिखने के अलावा, उन्होंने देशभर में प्रकाशित 100 से अधिक किताबों के शीर्षक (नाम) भी तय किए हैं। समारोह में वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता प्रो रूपरेखा वर्मा, युवा लेखक हफीज अतीक किदवई, प्रो.रमेश दीक्षित, नदीम हसनैन साहब,वंदना मैंम, भगवान स्वरूप कटियार, शबनम रिज़वी,प्रो अनिल त्रिपाठी, शनने नक़वी,डॉ अवंतिका सिंह और आशीष यादव,अनुराग शुक्ला ,सानिध्य अवध,आशीष आनन्द,नवीन तिवारी,आनन्द वर्धन सिंह,वीरेंद्र त्रिपाठी, प्रभात जी सहित अनेक संस्कृतिकर्मी, लेखक एवं पत्रकार शामिल रहे।

