दिग्गजों के संबोधन: व्यापार समाज की आर्थिक रीढ़, अध्यक्ष का आश्वासन
मुख्य अतिथि और सम्मान समारोह, शपथ ग्रहण और कार्यकारिणी का गठन
लखनऊ। आलमबाग के चन्दरनगर में सोमवार को आलमबाग चन्दरनगर व्यापार मण्डल (सम्बद्ध लखनऊ व्यापार मण्डल) का शपथ ग्रहण समारोह एक गरिमामय और उत्साहपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर नवगठित कार्यकारिणी के पदाधिकारियों ने व्यापारी हितों की रक्षा और संगठन की मजबूती की शपथ ली।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व विधायक सुरेश तिवारी उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथियों में लखनऊ व्यापार मण्डल के चेयरमैन अनिल वरमानी, राजेंद्र कुमार अग्रवाल और अध्यक्ष अमरनाथ मिश्र ने शिरकत की। समारोह का शुभारंभ अतिथियों के स्वागत से हुआ, जहाँ पदाधिकारियों को बड़ी माला, मोमेंटो और अंग वस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया।
लखनऊ व्यापार मंडल के अध्यक्ष अमरनाथ मिश्र ने सोमेश मिश्र को अध्यक्ष, मोहन खत्री को वरिष्ठ महामंत्री, विनोद भाटिया को कोषाध्यक्ष और अभिषेक सडाना को महामंत्री पद की शपथ दिलाई। इनके साथ ही वरिष्ठ उपाध्यक्ष जुगुल किशोर भवनानी, अफाक खान, सुनील मालानी समेत उपाध्यक्षों, सचिवों, प्रचार मंत्रियों और कार्यकारिणी सदस्यों सहित पूरी टीम को पद एवं गोपनीयता का संकल्प दिलाया गया।
पूर्व विधायक सुरेश तिवारी ने कहा कि व्यापार मंडल समाज की आर्थिक रीढ़ है। संगठित व्यापारी न केवल अपने हितों की रक्षा करता है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी गति देता है। राजेंद्र कुमार अग्रवाल ने टीम को पारदर्शिता और सेवा भावना से कार्य करने की प्रेरणा दी। लखनऊ व्यापार मण्डल के अध्यक्ष अमरनाथ मिश्र ने अपने ओजस्वी संबोधन में कहा, “यह अवसर केवल शपथ ग्रहण नहीं, बल्कि हमारे सामूहिक विश्वास और स्वाभिमान का उत्सव है। संगठन की शक्ति एकता में है। हमारा उद्देश्य टकराव नहीं बल्कि संवाद है, लेकिन व्यापारियों के सम्मान से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।” उन्होंने बाजार की सुरक्षा, साफ-सफाई और कर संबंधी जटिलताओं के समाधान को प्राथमिकता बताया।
नवनियुक्त अध्यक्ष सोमेश मिश्र ने आभार व्यक्त करते हुए समस्त व्यापारियों को आश्वस्त किया कि संगठन उनकी हर समस्या—प्रशासनिक हो या स्थानीय—को मजबूती से अधिकारियों तक पहुँचाएगा। उन्होंने छोटे और मध्यम व्यापारियों को विशेष सहयोग देने तथा पार्किंग व सुरक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए निरंतर संघर्ष करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का समापन ‘जय व्यापारी एकता’ के नारों के साथ हुआ।

