साहित्यिक संगम: लखनऊ में गूँजी राजस्थान की कविताएँ, ‘कविता की ज़मीन’ का आठवाँ संस्करण सम्पन्न

Anoop

March 16, 2026

जनवादी लेखक संघ, उत्तर प्रदेश के “कविता की ज़मीन”श्रृंखला का आठवां संस्करण आयोजित

कैफी आज़मी अकादमी सभागार बना हुआ हिंदी साहित्य के अनूठे मेल-मिलाप का गवाह

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के कैफी आज़मी अकादमी रविवार को हिंदी साहित्य के अनूठे मेल-मिलाप का गवाह बनी। जनवादी लेखक संघ, उत्तर प्रदेश की ओर से आयोजित “कविता की ज़मीन” श्रृंखला के आठवें संस्करण में राजस्थान और उत्तर प्रदेश के रचनाकारों के बीच वैचारिक और काव्य संवाद का सफल आयोजन हुआ।

कार्यक्रम की शुरुआत एक शोक सभा से हुई, जिसमें प्रख्यात मार्क्सवादी चिंतक जनार्दन प्रसाद सिंह के निधन पर दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इसके पश्चात, वरिष्ठ आलोचक प्रो. नलिन रंजन सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया। वरिष्ठ साहित्यकार जीवन सिंह ने ‘हिंदी कविता में राजस्थान’ विषय पर सारगर्भित वक्तव्य देते हुए दोनों प्रदेशों के साहित्यिक रिश्तों की गहराई को रेखांकित किया।

काव्य पाठ: मरुधरा की गूँज और सामाजिक यथार्थ

राजस्थान से आए कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से समकालीन चुनौतियों और मानवीय संवेदनाओं को स्वर दिया। नागेन्द्र कुमावत ने अपनी पुस्तक ‘मौत और कच्ची बस्ती’ के अंश साझा किए। योगमाया सैनी ने ‘महुआ फिर उगेगा तुम्हारे रक्तबीज से’ जैसी कविताओं से संघर्ष और जीवटता को स्वर दिया। राघवेन्द्र रावत ने महाभारत के प्रसंगों और ‘लौट आना’ कविता से श्रोताओं को जोड़ा।

वीणा करमचंदानी: सिंधी और हिंदी में अपराध व युद्ध की विभीषिका पर मर्मस्पर्शी पाठ किया। हरिश करमचंदानी: युद्ध विरोधी कविताओं और सिंधी भाषा के माधुर्य से प्रभावित किया। अन्य कवियों में शैलेन्द्र चौहान, योगेंद्रमणि कौशिक (व्यंग्य), मदन मोहन, हंसराज चौधरी और भरत मीणा ने भी अपने काव्य कौशल से वाहवाही बटोरी।

साहित्यिक आदान-प्रदान की अनूठी पहल

कार्यक्रम अध्यक्ष सुभाष राय ने कहा कि उल्लेखनीय है कि इस श्रृंखला का सातवाँ संस्करण जयपुर में आयोजित हुआ था, जहाँ उत्तर प्रदेश के रचनाकारों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी। यह पहल भाषाई और क्षेत्रीय सीमाओं को तोड़कर साहित्य को एक साझा मंच प्रदान कर रही है। “कविता की ज़मीन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि दो राज्यों के लेखकों के बीच संवाद का एक जीवंत सेतु है।” कार्यक्रम का कुशल संचालन ज्ञान प्रकाश चौबे ने किया। बड़ी संख्या में उपस्थित साहित्य प्रेमियों की उपस्थिति ने कवियों का उत्साहवर्धन किया। अंत में आभा खरे ने सभी अतिथियों और श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम के समापन की घोषणा की।

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