डॉ अमिता ने दिवंगत साहित्यकार डॉ. शम्भुनाथ को समर्पित की कृति
लेखिका डॉ. अमिता दुबे की अब तक 63 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं
लखनऊ। राजधानी के चारबाग स्थित रवीन्द्रालय में चल रहे ‘लखनऊ पुस्तक मेले’ का तीसरा दिन पूर्णतः साहित्य और संवेदनाओं के नाम रहा। रविवार की इस विशेष संध्या का मुख्य आकर्षण प्रतिष्ठित लेखिका डॉ. अमिता दुबे की नवीनतम पुस्तक ‘भाव सुमन की सुगंध’ का भव्य विमोचन रहा।
डॉ. अमिता दुबे की यह 63वीं पुस्तक पूर्व मुख्य सचिव और प्रख्यात साहित्यकार डॉ. शम्भुनाथ के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को समर्पित है। विमोचन के दौरान डॉ. अमिता अत्यंत भावुक नजर आईं। उन्होंने कहा, “यह पुस्तक मात्र एक संकलन नहीं, बल्कि डॉ. शम्भुनाथ जैसे मनीषी के प्रति मेरी शब्द-श्रद्धांजलि है।” कार्यक्रम में मौजूद डी.एन. लाल, सुधाकर अदीब और अलका प्रमोद जैसे दिग्गजों ने डॉ. अमिता की निरंतर सृजनशीलता की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने दिवंगत विभूतियों के अवदान को सहेजने का महान कार्य किया है।
ग़ज़लों की महफिल में उमड़ी दाद
मेले के सांस्कृतिक मंच पर ‘साहित्यकार संसद’ और ‘नमन प्रकाशन’ की ओर से आयोजित ग़ज़ल संध्या ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। गजलकार ज्योति शेखर के शेर— “दोस्त हैं जो हमारे रिश्ते को हर तरह से निबाह लेते हैं, हमसे कोई खता जो हो जाए, अपने सर पे गुनाह लेते हैं”—ने खूब वाहवाही बटोरी। वहीं, शायर रामप्रकाश बेखुद और कृपाशंकर ‘विश्वास’ ने अपनी रचनाओं से व्यवस्था और मानवीय रिश्तों पर गहरी चोट की।
कला और साहित्य का अनूठा संगम
एक ओर जहाँ ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने पर 15 फीट लंबे कैनवास पर चित्रकारों ने राष्ट्रगीत की भावनाओं को उकेरा, वहीं दूसरी ओर पाठकों में नीलोत्पल मृणाल की ‘विश्वगुरु’ और ‘शर्मा बुक प्रयागराज’ के स्टाल पर उपलब्ध हकीम लुकमान के प्राचीन नुस्खों को लेकर जबरदस्त उत्साह दिखा। सोमवार को मेले में सुबह 11 बजे से काव्यगोष्ठी का आयोजन होगा। दोपहर में डॉ. अमरेश मोहन की पुस्तक का विमोचन और शाम को ‘अवधी व्यंजन उत्सव’ के साथ ‘सुंदर साहित्य सम्मान समारोह’ संपन्न होगा।

