लखनऊ में 31वें पं. प्रताप नारायण मिश्र स्मृति युवा साहित्यकार सम्मान समारोह में छह प्रतिभाएं सम्मानित

Prashant

February 6, 2026

निराला नगर माधव सभागार, सरस्वती कुंज में ‘भाऊराव देवरस सेवा न्यास’ का

31वां पं. प्रताप नारायण मिश्र स्मृति युवा साहित्यकार सम्मान समारोह

लखनऊ। राजधानी के निराला नगर स्थित माधव सभागार, सरस्वती कुंज में ‘भाऊराव देवरस सेवा न्यास’ द्वारा 31वें पं. प्रताप नारायण मिश्र स्मृति युवा साहित्यकार सम्मान समारोह का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित परम पूज्य स्वामी गोविंद देव गिरि जी महाराज ने युवाओं को राष्ट्र निर्माण के लिए साहित्य सृजन की प्रेरणा दी। कार्यक्रम की अध्यक्षता ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजय तनेजा ने की।

समारोह में देश के विभिन्न हिस्सों से आए छह युवा साहित्यकारों को उनकी उत्कृष्ट कृतियों के लिए सम्मानित किया गया। काव्य विधा में बेगूसराय के राहुल शिवाय, कथा साहित्य में लखनऊ की वंदना चौबे, पत्रकारिता में पटना के अंशुमान झा, बाल साहित्य में अलीगढ़ के शादाब आलम, संस्कृत भाषा में नई दिल्ली की डॉ. दीपिका दीक्षित तथा भूटिया भाषा के लिए सिक्किम के जिग्मे वांगचुक भूटिया को पुरस्कृत किया गया। सभी विजेताओं को सम्मान स्वरूप 25,000 रुपये की धनराशि, अंग वस्त्र, स्मृति चिह्न और पं. प्रताप नारायण मिश्र का साहित्य प्रदान किया गया।

अपने संबोधन में स्वामी गोविंद देव गिरि जी महाराज ने कहा कि ‘शब्द’ स्थायी होता है और पूरी दुनिया शब्दों द्वारा ही शासित है। उन्होंने महर्षि वेदव्यास को विश्व का सर्वोच्च साहित्यकार बताते हुए कहा कि साहित्य वही उत्तम है जो लोक-मंगल की भावना से ओतप्रोत हो। उन्होंने लेखकों का आह्वान किया कि वे सावरकर जी के राष्ट्र-पुनर्जागरण के मार्ग पर चलते हुए ऐसा साहित्य लिखें जो संपूर्ण देश को एकता के सूत्र में पिरो सके। उन्होंने भाऊराव देवरस जी के राष्ट्रभक्ति के कार्यों का स्मरण करते हुए इसे ‘सरस्वती की सच्ची पूजा’ बताया।

कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रो. अजय तनेजा ने युवाओं को समाज की ‘प्राणवायु’ (ऑक्सीजन) करार देते हुए कहा कि विकसित भारत 2047 का लक्ष्य इन्हीं के कंधों पर है। उन्होंने सोशल मीडिया के दौर में गुणवत्तापूर्ण लेखन पर जोर दिया और कहा कि साहित्यकारों की जिम्मेदारी देश को परम वैभव की ओर ले जाने की है।

कार्यक्रम का संचालन शिव सिंह ने किया, जबकि जितेंद्र अग्रवाल ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। समारोह की शुरुआत बटुकों द्वारा मंगलाचरण से हुई और समापन ‘वन्दे मातरम्’ के गायन के साथ हुआ। इस अवसर पर न्यास के पदाधिकारी, वरिष्ठ प्रचारक कौशल जी, कार्यक्रम संयोजक प्रो. विजय कुमार कर्ण सहित भारी संख्या में विद्वान और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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