चारबाग रवीन्द्रालय में ‘लखनऊ पुस्तक मेले’ के दूसरे रोज साहित्य-संस्कृति का दिखा अनूठा संगम
मुख्य केंद्र वास्तुविद विपुल बी. वार्ष्णेय की पुस्तक ‘अवध के मंदिर’ का लोकार्पण एवं परिचर्चा रहा
लखनऊ। चारबाग स्थित रवीन्द्रालय के प्रांगण में चल रहे ‘लखनऊ पुस्तक मेले’ के दूसरे दिन साहित्य और संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला। मेले में जहाँ एक ओर अध्यात्म और इतिहास की पुस्तकों की धूम है, वहीं युवा पीढ़ी शहीद भगत सिंह के विचारों की ओर विशेष रूप से आकर्षित नजर आ रही है।
मेले के दूसरे दिन का मुख्य केंद्र वास्तुविद विपुल बी. वार्ष्णेय की पुस्तक ‘अवध के मंदिर’ का लोकार्पण एवं परिचर्चा रही। पद्मश्री डॉ. विद्या विंदु सिंह की अध्यक्षता में आयोजित इस सत्र में अवध की स्थापत्य कला और सांस्कृतिक विरासत पर गंभीर मंथन हुआ।
परिचर्चा में डॉ. आनंद प्रकाश माहेश्वरी, लेखिका विपुल वार्ष्णेय और अलका प्रमोद ने अपने विचार रखे। पद्मश्री डॉ विद्याविंदु सिंह ने कहा कि सहज, सरल और प्रवाहमय भाषा में लिखी गई यह पुस्तक अवध के मंदिरों के अनछुए पहलुओं को पाठकों के सामने रखती है। कार्यक्रम का सफल संचालन चंद्र शेखर वर्मा ने किया।
नेशनल बुक ट्रस्ट के स्टॉल पर युवाओं की भारी भीड़ देखी गई। एनबीटी के अधिकारी नरेंद्र सिंह के अनुसार, भगत सिंह की सुप्रसिद्ध कृति ‘मैं नास्तिक क्यों हूँ’ युवाओं के बीच हॉट-सेलर बनी हुई है। इसके साथ ही बच्चों के लिए ‘वैदिक मैथमेटिक्स’ और ‘द स्टोरी ऑफ अवर रिवर्स’ जैसी ज्ञानवर्धक किताबों की खासी मांग है। लखनऊ के अदबी मिजाज के कारण उर्दू साहित्य की पुस्तकों को भी भरपूर सराहना मिल रही है।

विमोचन और चर्चाओं का चला दौर
दिन भर चले साहित्यिक सत्रों में ‘नवसृजन प्रकाशन’ द्वारा कई कृतियों का विमोचन किया गया, जिनमें मंजू सक्सेना का लघुकथा संग्रह ‘एक कप चाय’ और श्रीकृष्ण द्विवेदी का छंद संग्रह ‘छाया बसन्त रहे’ प्रमुख रहे। डॉ. शिप्रा चतुर्वेदी की पुस्तक ‘जर्मन लोककथाएं’ पर हुई चर्चा के दौरान बच्चों द्वारा ‘टिल’ कहानी का जीवंत मंचन भी किया गया।
मेले के तीसरे दिन रविवार 15 मार्च को सुबह 10 बजे: ‘वंदे मातरम्’ पर चित्रण होगा। दोपहर दो बजे कथा संग्रह ‘प्रेम एक नदी’ का विमोचन और शाम शाम 5 बजे: अमिता दुबे की नव प्रकाशित पुस्तक ‘अवधी व्यंजन’ पर विशेष परिचर्चा होगी। 5:30 बजे युवा रचनाकार मंच का लोकार्पण एवं काव्य गोष्ठी होगी।

