“मैं पेंटर नहीं हूँ!”-सिस्टिन चैपल बनाने वाले माइकल एंजेलो आखिर क्यों नफरत करते थे अपनी सबसे महान कृति से?

Anoop

February 26, 2026

 जिस काम को माइकल एंजेलो ने “टॉर्चर” कहा, उसी ने उन्हें अमर बना दिया

नीलामी में उनकी लाल चॉक से बनी एक ड्राइंग $27.2 मिलियन में बिकी, टूटा रेकॉर्ड

पुनर्जागरण काल (रेनेसां) के महान कलाकार माइकल एंजेलो को आज पूरी दुनिया सिस्टिन चैपल की छतों पर उकेरी गई अद्भुत पेंटिंग्स के लिए पूजती है। लेकिन इतिहास के पन्ने गवाही देते हैं कि जिसे दुनिया ‘ईश्वरीय कृति’ मानती है, कलाकार के लिए वह काम किसी “नर्क” से कम नहीं था। हाल ही में एक नीलामी में उनके द्वारा लाल चॉक से बनाई गई एक महिला के पैर की ड्राइंग का $27.2 मिलियन (लगभग 225 करोड़ रुपये) में बिकना, इस बात का प्रमाण है कि जिस काम को उन्होंने “प्रताड़ना” कहा, वही आज कला जगत की सबसे कीमती विरासत है।

माइकल एंजेलो का दिल हमेशा संगमरमर के पत्थरों में बसता था। बात 1506 की है, जब पोप जूलियस II ने सेंट पीटर्स बेसिलिका में एक भव्य मकबरे के लिए उनके प्रिय मूर्तिकला प्रोजेक्ट को रोक दिया। इस अपमान से आहत होकर कलाकार ने अपना स्टूडियो बंद कर दिया और गुस्से में रोम छोड़ दिया। हालांकि, 1508 में पोप और उनके बिचौलिए उन्हें वापस लाने में कामयाब रहे, लेकिन इस बार उनके सामने एक ऐसी चुनौती थी जिसे वे स्वीकार नहीं करना चाहते थे, वो अनुबंध था सिस्टन चैपल की छत को पेंट करने का काम।

“पेंटिंग मेरी कला नहीं है”

माइकल एंजेलो ने भारी मन से इस काम को स्वीकार तो कर लिया, लेकिन उनके मन में गहरी कड़वाहट थी। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि “पेंटिंग मेरा प्रोफेशन नहीं है” और पोप से भी यही दोहराया कि यह उनकी कला नहीं है।” वह खुद को हमेशा एक मूर्तिकार ही मानते थे। अपने दोस्त जियोवानी दा पिस्टोइया को लिखी एक व्यंग्यात्मक कविता में उन्होंने छत के नीचे के शारीरिक कष्ट का वर्णन किया कि “मेरा पेट मेरी ठुड्डी के नीचे दबा है, दाढ़ी आसमान की तरफ है और मेरा दिमाग एक ताबूत में कुचला जा रहा है। ब्रश से लगातार टपकता पेंट मेरे चेहरे को गंदा कर रहा है… मेरी पेंटिंग मर चुकी है, मैं सही जगह पर नहीं हूँ – मैं पेंटर नहीं हूँ।” इस दौरान उनकी गर्दन और पीठ की हालत इतनी खराब हो गई थी कि वे महीनों तक सीधे खड़े होकर पत्र तक नहीं पढ़ पाते थे।

‘डिसेग्नो’: ड्राइंग के प्रति अटूट समर्पण

भले ही उन्हें पेंटिंग की प्रक्रिया से चिढ़ थी, लेकिन उनकी डिसेग्नो’ यानी ड्राइंग और डिज़ाइन के प्रति निष्ठा अटूट थी। विशेषज्ञों का मानना है कि वे ड्राइंग को पेंटिंग से कहीं अधिक महत्वपूर्ण मानते थे, क्योंकि यही उनके दिमाग के ‘विज़न’ को कागज पर उतारने का जरिया थी। प्रसिद्ध लीबिया की सिबिल’ जैसी आकृतियों को अंतिम रूप देने से पहले उन्होंने सैकड़ों विस्तृत स्केच बनाए। हाल ही में बिकी $27.2 मिलियन की ड्राइंग इसी तैयारी का हिस्सा थी। यह दिखाती है कि कैसे एक मूर्तिकार ने पेंटिंग में भी ‘स्कल्पचरल पोज़’ (जैसे कॉन्ट्रापोस्टो) का इस्तेमाल किया, ताकि आकृतियाँ पत्थर की तरह जीवंत लगें।

विरासत: ‘यूनिवर्सल मैन’ की पहचान

सिस्टिन चैपल की भारी सफलता के बावजूद, माइकल एंजेलो लंबे समय तक पेंटिंग से दूर रहे। 1534 में वे ‘द लास्ट जजमेंट’ के लिए वापस लौटे, लेकिन तब तक उनकी पहचान एक ‘यूनिवर्सल मैन’ की बन चुकी थी। 1563 में उन्हें फ्लोरेंस की प्रसिद्ध ‘एकेडेमिया डेल डिसेग्नो’ का मास्टर बनाया गया। उन्हें वेटिकन का ‘चीफ आर्किटेक्ट, मूर्तिकार और पेंटर’ घोषित किया गया। आज सिस्टिन चैपल की छत केवल एक कलाकृति नहीं, बल्कि एक ऐसे कलाकार की जीत का प्रतीक है जिसने अपनी पसंद के खिलाफ जाकर, अपने कष्टों को कला में बदल दिया। उनकी ड्राइंग्स साबित करती हैं कि जिस काम को उन्होंने “टॉर्चर” कहा, उसी ने उन्हें इतिहास में अमर बना दिया।

अमेरिका के एक व्यक्ति को अपनी दादी से विरासत में माइकलएंजेलो का एक दुर्लभ स्केच मिला, जिसकी असलियत से वह अनजान था। विशेषज्ञों ने पहचान की कि यह 1511-1512 के दौरान वैटिकन के सिस्टीन चैपल की प्रसिद्ध पेंटिंग ‘लिबियन सिबिल’ की तैयारी के लिए बनाया गया शुरुआती स्केच था।

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