बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान में 2 से 4 फरवरी तक ‘रॉक मैग्नेटिज़्म इन अर्थ साइंसेज़’ विषयक कार्यशाला
प्रतिभागियों को क्षेत्र से नमूने एकत्र करने से लेकर प्रयोगशाला में उनके विश्लेषण तक का प्रशिक्षण दिया जाएगा
लखनऊ। बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान (BSIP) में 2 से 4 फरवरी 2026 तक ‘रॉक मैग्नेटिज़्म इन अर्थ साइंसेज़’ (RMES-2026) विषय पर एक महत्वपूर्ण तीन दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है । इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य भूविज्ञान के छात्रों और शोधकर्ताओं को रॉक मैग्नेटिज़्म की आधुनिक तकनीकों और उनके व्यावहारिक अनुप्रयोगों से अवगत कराना है ।
रॉक मैग्नेटिज़्म चट्टानों और मिट्टी के चुंबकीय गुणों का अध्ययन है, जो पृथ्वी के प्राचीन चुंबकीय क्षेत्र, जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय बदलावों को समझने में मदद करता है । प्रतिभागियों को क्षेत्र से नमूने एकत्र करने से लेकर प्रयोगशाला में उनके विश्लेषण तक का प्रशिक्षण दिया जाएगा । इसका उपयोग पुराचुंबकत्व, प्लेट विवर्तनिकी, पुराजलवायु अध्ययन और प्रदूषण की निगरानी जैसे क्षेत्रों में किया जाता है । इस कार्यशाला में स्नातकोत्तर छात्र, शोधार्थी और शिक्षक हिस्सा ले रहे हैं ।
प्रो. एम. जी. ठक्कर (निदेशक, BSIP): उन्होंने बताया कि चुंबकीय मापों से मानसून की तीव्रता और अतीत की जलवायु को समझा जा सकता है । उन्होंने ‘मैग्नेटोरिसेप्शन’ का उल्लेख करते हुए बताया कि पक्षी भी दिशा-निर्धारण के लिए पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र का उपयोग करते हैं । प्रो. अशोक सहनी (मुख्य अतिथि): उन्होंने अपने शोध अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि कैसे पुराचुंबकीय दिनांकन (Palaeomagnetic dating) ने दक्कन की चट्टानों और डायनासोर के अवशेषों के काल निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई ।
डॉ. बिनिता फर्तियाल (सह-संयोजक): उन्होंने जानकारी दी कि BSIP की पुराचुंबकत्व प्रयोगशाला अब एक प्रमुख राष्ट्रीय सुविधा के रूप में कार्य कर रही है । डॉ. मोहम्मद आरिफ (संयोजक): उन्होंने संस्थान की आधुनिक प्रयोगशालाओं और रॉक मैग्नेटिज़्म की उपयोगिता पर प्रकाश डाला । कार्यक्रम का उद्घाटन दीप प्रज्वलन के साथ हुआ और इसका समापन डॉ. बिनिता फर्तियाल के धन्यवाद ज्ञापन के साथ किया गया ।
कार्यशाला की मुख्य विशेषताएँ
इस आयोजन में देश के प्रतिष्ठित संस्थानों जैसे IIT कानपुर, IIT खड़गपुर, और CSIR-NGRI हैदराबाद के विशेषज्ञ व्याख्यान और प्रशिक्षण देंगे । कार्यशाला के दौरान निम्नलिखित विषयों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। जिनमें रॉक मैग्नेटिज़्म और पुराचुंबकत्व की मूल अवधारणाएँ । चुंबकीय खनिज चरित्रांकन और मृदा विश्लेषण । चुंबकीय अनिसोट्रॉपी (AMS) और डेटा विश्लेषण । उन्नत चुंबकीय उपकरणों पर हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण शामिल है ।

