631 करोड़ की परियोजना को सुप्रीम कोर्ट की अंतिम मंज़ूरी का इंतज़ार
CEC की सिफारिशों के साथ आगे बढ़ेगा नाइट सफारी और डे ज़ू प्रोजेक्ट
लखनऊ। कुकरैल रिज़र्व फ़ॉरेस्ट में प्रस्तावित भारत की पहली नाइट सफारी के शुरू होने का रास्ता लगभग साफ़ होता दिख रहा है। अधिकारियों को उम्मीद है कि जनवरी के अंत तक सुप्रीम कोर्ट से अंतिम मंज़ूरी मिल सकती है, जिसके बाद इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट पर काम तेज़ी से शुरू हो जाएगा। मंज़ूरी मिलने के बाद सबसे पहले बाउंड्री वॉल के निर्माण का कार्य किया जाएगा।
नाइट सफारी पूरी तरह तैयार होने के बाद पर्यटकों को ट्राम में बैठकर कृत्रिम चांदनी के वातावरण में जानवरों को देखने का अनूठा अनुभव मिलेगा। करीब 40 मिनट के इस सफारी टूर में जानवरों और पर्यटकों के रास्तों को खाई या कांच की दीवार के जरिए अलग रखा जाएगा, जिससे सुरक्षा और प्राकृतिक व्यवहार दोनों सुनिश्चित हो सकें।
राज्य सरकार ने पिछले बजट में इस प्रोजेक्ट के लिए 631 करोड़ रुपये मंजूर किए थे, जिनमें से 206 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। निर्माण एजेंसी का चयन भी हो चुका है। कुकरैल जंगल के उत्तर में 855 एकड़ क्षेत्र में फैले इस प्रोजेक्ट को पांच हिस्सों में विकसित किया जाना प्रस्तावित है, जिनमें नाइट सफारी, डे ज़ू, इकोटूरिज्म ज़ोन, सफारी तक पहुंचने वाली सड़क और लखनऊ चिड़ियाघर से जुड़ा एक घटक शामिल है।
परियोजना के तहत नाइट सफारी को 400 एकड़ और डे ज़ू को 200 एकड़ क्षेत्र में विकसित किया जाएगा। दोनों क्षेत्रों में मिलाकर लगभग 115 प्रजातियों के जानवर देखने को मिलेंगे। इसके अलावा जानवरों के लिए 63 आधुनिक बाड़ों का निर्माण किया जाएगा। पर्यटकों के लिए हरियाली से घिरे विश्राम स्थल, कैफेटेरिया और अन्य बुनियादी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 29 अगस्त को सुनवाई के बाद इसे सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (CEC) को भेजा था। CEC ने 27 नवंबर को अपनी सिफारिशें देते हुए नाइट सफारी और डे ज़ू को मंज़ूरी दी, लेकिन फोर-लेन सड़क और रिज़र्व फॉरेस्ट में इकोटूरिज्म ज़ोन के निर्माण पर आपत्ति जताई। अब उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई 19 जनवरी को करेगा।

