महानता के लिए दिव्य गुण, दृढ़ संकल्प और परमार्थ की दृष्टि आवश्यक: योगी
रामानन्द परम्परा आज भी समाज को जोड़ने का कार्य कर रही: मुख्यमंत्री
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जनपद प्रयागराज में आयोजित श्रीमद् जगद्गुरु श्री रामानन्दाचार्य भगवान के 726वें प्राकट्योत्सव समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति अचानक महान नहीं बन जाता। महानता के लिए दिव्य गुणों को आत्मसात करने की क्षमता, दृढ़ संकल्प और परमार्थ की दृष्टि आवश्यक होती है। एक महामानव की दृष्टि ईश्वरीय, कल्याणमयी और समाज हित में होती है—ऐसा ही कार्य पूज्यपाद जगद्गुरु रामानन्दाचार्य भगवान ने किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 726 वर्ष पूर्व जब जगद्गुरु रामानन्दाचार्य का इस पावन धरा पर प्राकट्य हुआ, उस समय विदेशी आक्रमणों के कारण सामाजिक ताने-बाने को तोड़ने के प्रयास हो रहे थे। ऐसे कालखंड में उन्होंने मत और सम्प्रदायों को जोड़ते हुए ‘सर्वे प्रपत्तेरधिकारिणो मताः’ का संदेश दिया और समाज को एकता के सूत्र में बांधा। मुख्यमंत्री ने बताया कि जगद्गुरु रामानन्दाचार्य जी ने विभिन्न जातियों के द्वादश शिष्यों को दीक्षा दी, जिनमें कबीरदास, रविदास, पीपाजी, धन्ना, सेन सहित अन्य संत शामिल थे। इन सभी ने समाज को जोड़ने का कार्य किया। रामानन्द परम्परा से निकली सगुण और निर्गुण उपासना की धाराएं आज भी सामाजिक समरसता को मजबूत कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि ‘जाति-पांति पूछे नहिं कोई, हरि को भजे सो हरि का होई’ का संदेश आज भी समाज को जोड़ने वाला मंत्र है। मुख्यमंत्री ने दारागंज स्थित जगद्गुरु रामानन्दाचार्य के प्राकट्य स्थल पर स्मारक और मंदिर निर्माण की आवश्यकता जताते हुए कहा कि प्रदेश सरकार इस कार्य में पूरा सहयोग करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि संत समाज जब एक मंच पर आकर समाज को जोड़ने का उद्घोष करता है, तो उसके सकारात्मक परिणाम सामने आते हैं। अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर का निर्माण इसी संत एकता का उदाहरण है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना करते हुए कहा कि नमामि गंगे परियोजना के माध्यम से माँ गंगा को स्वच्छ और निर्मल बनाने का कार्य कर भारत की मूल आत्मा को सम्मान दिलाया गया है। इस अवसर पर अनेक संत-महात्मा, मंत्रीगण और गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

