एक शेल्टर में रह सकेंगे पांच हजार कुत्ते, डेढ़ लाख आवारा कुत्तों के लिए बनेंगे आश्रय स्थल
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर नगर निगम सक्रिय, आवारा कुत्तों के लिए शेल्टर होम की योजना
लखनऊ। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद लखनऊ नगर निगम ने शहर में आवारा कुत्तों के लिए शेल्टर होम (आश्रय स्थल) बनाने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। फिलहाल दो शेल्टर होम के लिए जमीन की तलाश शुरू कर दी गई है। नगर निगम के अनुसार, एक शेल्टर होम में करीब पांच हजार कुत्तों को रखा जा सकेगा।
शहर में इस समय अनुमानित डेढ़ लाख से अधिक आवारा कुत्ते हैं। इस संख्या के आधार पर नगर निगम को लगभग 30 आश्रय स्थल बनाने की आवश्यकता होगी। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों, सार्वजनिक खेल परिसरों, बस अड्डों और रेलवे स्टेशनों जैसे सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाकर शेल्टर होम में रखा जाए और वहीं उनकी नसबंदी कराई जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि हटाए गए कुत्तों को दोबारा उसी क्षेत्र में न छोड़ा जाए।
फिलहाल पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने के लिए केवल नसबंदी की व्यवस्था है। नसबंदी के बाद कुत्तों को उसी स्थान पर छोड़ दिया जाता है, जहां से उन्हें पकड़ा गया हो। विशेषज्ञों का मानना है कि जितनी संख्या में नसबंदी हो पा रही है, उससे अधिक संख्या में कुत्तों का जन्म हो रहा है, इसी कारण समस्या बनी हुई है।
नगर निगम द्वारा नया नसबंदी केंद्र भी तैयार किया गया है, जिसे शुरू होने में लगभग तीन महीने का समय लगेगा। पशु कल्याण अधिकारी डॉ. अभिनव वर्मा के अनुसार शासन से फिलहाल एक शेल्टर होम के निर्माण का आदेश मिला है, लेकिन आवारा कुत्तों की अधिक संख्या को देखते हुए दूसरे शेल्टर होम के लिए भी जमीन की तलाश की जा रही है। प्रस्तावित आश्रय स्थलों में कुत्तों के भोजन, देखभाल और इलाज की समुचित व्यवस्था की जाएगी।

