सुप्रीम कोर्ट की सीईसी ने नाइट सफारी को दी सैद्धांतिक मंजूरी, स्थानांतरण प्रस्ताव अस्वीकृत
कुकरैल में नाइट सफारी के एडवेंचर जोन पर रोक, पर्यावरण रिपोर्ट पर विचार आवश्यक
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार नवाब वाजिद अली शाह प्राणी उद्यान को कुकरैल में स्थानांतरित करने के लिए अपना पक्ष सुप्रीम कोर्ट में रखेगी। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट की केंद्रीय पर्यावरण समिति (सीईसी) की हालिया सिफारिशों के बाद लिया गया है।
सीईसी ने लखनऊ के कुकरैल में प्रस्तावित नाइट सफारी परियोजना को सैद्धांतिक अनुमति दी है, लेकिन चिड़ियाघर के स्थानांतरण के प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी। नाइट सफारी को चिड़ियाघर में ही बनाने का प्रावधान होने के कारण, सरकार ने चिड़ियाघर को कुकरैल में स्थानांतरित करने के साथ वहां नाइट सफारी बनाने का प्रस्ताव रखा था।
उत्तर प्रदेश के हेड ऑफ फॉरेस्ट सुनील चौधरी ने बताया कि शासन इस प्रस्ताव के पक्ष को कोर्ट में प्रस्तुत करेगा। कुकरैल वन में नाइट सफारी बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट की स्वीकृति अनिवार्य है, इसलिए कोर्ट ने परियोजना के पर्यावरणीय प्रभाव की रिपोर्ट सीईसी से मांगी थी।
सीईसी ने नाइट सफारी में प्रस्तावित एडवेंचर जोन को रद्द करने की सिफारिश भी की है। एडवेंचर जोन के तहत जिप लाइन सहित तमाम रोमांचक गतिविधियां शामिल थीं, जिन्हें पर्यावरणीय कारणों से अनुमति नहीं दी गई।
इस परियोजना के तहत चिड़ियाघर का स्थानांतरण और नाइट सफारी का विकास पर्यावरण, वन्य जीवन संरक्षण और पर्यटन को ध्यान में रखकर किया जाएगा। प्रदेश सरकार का कहना है कि वह कोर्ट में अपनी दलील के माध्यम से चिड़ियाघर और नाइट सफारी के संतुलित विकास की जरूरत को स्पष्ट करेगी। स्रोत के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट जल्द ही प्रदेश सरकार के पक्ष और सीईसी की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्यवाही का निर्णय ले सकती है।

