मर्यादापुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के शौर्य, संयम और मर्यादा का जीवंत चित्रण बना लोकनाट्य

Anoop

December 29, 2025

सवेरा फाउंडेशन की प्रस्तुति को अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान में दर्शकों का भरपूर स्नेह

मंचन 29 दिसम्बर को अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान, गोमतीनगर के प्रेक्षागृह में किया गया

लखनऊ। सवेरा फाउंडेशन की ओर से पारम्परिक लोकनाट्य ‘धनुष भंग – रामलीला का भावपूर्ण मंचन 29 दिसम्बर को अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान, गोमतीनगर के प्रेक्षागृह में किया गया। ग्रामीण लोकशैली में प्रस्तुत इस रामलीला को दर्शकों की भरपूर सराहना और तालियाँ मिलीं।

नाट्य मंचन के दौरान मुख्य अतिथि वरिष्ठ रेल अधिकारी राजीव कुमार, वरिष्ठ रंगकर्मी राजेश कुमार श्रीवास्तव का नाट्य निर्देशक श्रीपाल गौड़ ने अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित करते हुए स्वागत किया गया। अतिथियों ने सवेरा फाउंडेशन की इस नवीन और पारम्परिक लोकनाट्य प्रस्तुति की सराहना करते हुए कलाकारों को बधाई दी और कहा कि ऐसे आयोजन भारतीय सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।  

नाट्य प्रस्तुति रामलीला के प्रमुख प्रसंग धनुष भंग पर आधारित रही। कथा का आरंभ मारीच के दरबार से हुआ, जहाँ राक्षसों द्वारा विश्वामित्र के आश्रम में किए जा रहे उपद्रव को प्रभावी ढंग से दर्शाया गया। इसके बाद विश्वामित्र का अयोध्या आगमन और राजा दशरथ से राम-लक्ष्मण को आश्रम की रक्षा के लिए ले जाने का दृश्य मंचित हुआ। राम और लक्ष्मण द्वारा राक्षसों का वध तथा आश्रम की रक्षा के उपरांत कथा मिथिला पहुँची, जहाँ सीता स्वयंवर और धनुष भंग का दृश्य विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।

धनुष भंग के बाद परशुराम के आगमन, लक्ष्मण से संवाद और अंत में श्रीराम द्वारा परशुराम के क्रोध को शांत करने का दृश्य दर्शकों को भावविभोर कर गया। पूरी प्रस्तुति में संवाद सरल, सहज और लोकनाट्य शैली में रहे, जिससे पारम्परिक ग्रामीण रामलीला की झलक स्पष्ट रूप से दिखाई दी। हास्य और भावनात्मक प्रसंगों ने मंचन को और जीवंत बना दिया।

राम की भूमिका में अक्षत ऋषि, लक्ष्मण के रूप में ओमकार पुष्कर और सीता की भूमिका में रिमझिम वर्मा ने सशक्त अभिनय किया। रावण की भूमिका में संजय शर्मा और परशुराम के रूप में संजय त्रिपाठी प्रभावशाली रहे। विश्वामित्र की भूमिका नीरज शब्द ने निभाई। संगीत पक्ष में हारमोनियम पर अमित कश्यप और ढोलक पर राजेन्द्र गौड़ ने मंचन को प्रभावी बनाया। नाट्य प्रस्तुति का निर्देशन श्रीपाल गौड़ ने किया, जबकि संवाद लेखन श्रद्धेय रामकुमार त्रिपाठी ‘निर्द्वंद’ का रहा। कार्यक्रम के अंत में दर्शकों ने कलाकारों का तालियों से उत्साहवर्धन किया।

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