दलित व पिछड़े वर्ग के अभियंताओं को न्याय के लिए क्यों जाना पड़ता है उच्च न्यायालय
आगामी 4 जनवरी को लखनऊ में प्रांतीय कार्य समिति की प्रादेशिक सेवानिवृत्ति सम्मान समारोह
लखनऊ। उत्तर प्रदेश पावर ऑफिसर्स एसोसिएशन की एक आपात बैठक आयोजित की गई, जिसमें प्रदेश की सभी बिजली कंपनियों में कार्यरत दलित एवं पिछड़े वर्ग के अभियंताओं/ कार्मिकों की समस्याओं पर गंभीर चर्चा हुई। बैठक में अकारण निलंबन, पदोन्नति में भेदभाव एवं उच्च न्यायालय के आदेशों की अवहेलना पर गहरा रोष व्यक्त किया गया।
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि आगामी 4 जनवरी को लखनऊ में प्रांतीय कार्य समिति की ओर से एक प्रादेशिक सेवानिवृत्ति सम्मान समारोह आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम में प्रदेश की सभी बिजली कंपनियों से जनवरी 2025 से दिसंबर 2025 के बीच सेवानिवृत्त हुए अभियंता अधिकारियों का सम्मान किया जाएगा। शनिवार को आयोजित बैठक में समारोह की तैयारियों की समीक्षा भी की गई।
एसोसिएशन के अध्यक्ष आरपी केन, कार्यवाहक अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा, उपाध्यक्ष नेकीराम, पीएम प्रभाकर, संगठन सचिव हरिश्चंद्र वर्मा, धीरेंद्र कुमार, ट्रांसको के अध्यक्ष सुशील कुमार वर्मा, एके प्रभाकर तथा पश्चिमांचल अध्यक्ष एमके अहिरवार ने कहा कि यह अत्यंत चिंताजनक है कि बिजली कंपनियों में दलित अभियंताओं को न्याय पाने के लिए उच्च न्यायालय की शरण लेनी पड़ रही है। अनेक मामलों में अवमानना याचिका दायर करने के बाद ही न्याय मिल रहा है।
बैठक में एक गंभीर प्रकरण पर विशेष चर्चा की गई। बनारस में तैनात तत्कालीन मुख्य अभियंता मुकेश बाबू को मात्र 21 दिनों में बिना दोष के निलंबित कर दिया गया। उन्होंने इस आदेश को उच्च न्यायालय, इलाहाबाद पीठ में चुनौती दी। न्यायालय ने 26 सितंबर को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि 8 सप्ताह (20 नवंबर तक) में पावर कॉरपोरेशन निर्णय ले, अन्यथा निलंबन आदेश स्वतः निरस्त माना जाएगा। निर्धारित समय-सीमा बीतने के एक माह से अधिक समय हो जाने के बावजूद प्रबंधन द्वारा कोई निर्णय नहीं लिया गया।
एसोसिएशन ने प्रश्न उठाया कि क्या पावर कॉरपोरेशन दलित अभियंताओं को केवल अवमानना याचिका के बाद ही न्याय देगा? संगठन ने उत्तर प्रदेश सरकार से इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की और चेतावनी दी कि यदि भेदभावपूर्ण रवैया जारी रहा तो आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी। बैठक के अंत में 4 जनवरी को प्रस्तावित सम्मान समारोह की तैयारियों की समीक्षा करते हुए इसे भव्य रूप देने का संकल्प लिया गया।

