भारत में 70 साल बाद चीते की वापसी ने सबको चौंका दिया है. प्रोजेक्ट चीता की सबसे बड़ी स्टार बनी मखी, जिसने तीन भाई-बहनों को खोने और माँ के द्वारा छोड़े जाने के बाद भी ज़िंदा रहकर इतिहास रच दिया.
भोपाल से बड़ी खुशखबरी आई है. कभी भारत से विलुप्त हो चुके चीते अब फिर से यहाँ अपनी पहचान बनाने लगे हैं. प्रोजेक्ट चीता को तीन साल पूरे हो गए हैं और इसका नतीजा बेहद शानदार रहा है. अब तक भारत में जन्मे 16 शावक इस प्रोजेक्ट की सफलता की गवाही दे रहे हैं.
मखी है जंगल की हीरो
सबसे बड़ी हीरो बनी है मखी, जो 29 मार्च 2023 को मध्यप्रदेश के कुनो नेशनल पार्क में पैदा हुई थी. मखी की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं. दरअसल, मखी के तीनों भाई-बहन जन्म के कुछ ही समय बाद मर गए थे और माँ ने उसे भी छोड़ दिया था. लेकिन जज़्बे और देखभाल के दम पर मखी ने न सिर्फ़ जिंदा रहकर सबको चौंकाया, बल्कि अब वह प्रोजेक्ट चीता की “सर्वाइवर स्टार” बन चुकी है.
वन विभाग के अफसरों का कहना है कि मखी ने तमाम मुश्किलों का सामना किया. कभी बीमारी, कभी अलगाव लेकिन हर बार उसने हार मानने के बजाय और मज़बूत होकर वापसी की. डॉक्टरों की टीम ने उसे समय-समय पर ट्रीटमेंट दिया, रिहैबिलिटेशन कराया और बेहद सतर्क नज़र रखी. आज मखी एक मजबूत और स्वस्थ चीता है, जो दुनिया भर के वन्यजीव विशेषज्ञों के लिए उम्मीद की किरण बन गई है.
प्रोजेक्ट चीता की शुरुआत
प्रोजेक्ट चीता की शुरुआत 2022 में नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से लाए गए चीतों के साथ हुई थी. तभी से कुनो नेशनल पार्क इस महत्वाकांक्षी योजना का केंद्र बना. लक्ष्य था कि भारत में 70 साल बाद फिर से चीतों को बसाया जाए. शुरुआत में कई शावकों की मौत भी हुई, लेकिन हालात धीरे-धीरे सुधरे. अब तस्वीर ये है कि भारत में जन्मे 16 शावक इस मिशन की सबसे बड़ी उपलब्धि माने जा रहे हैं.
कुनो है मध्यप्रदेश की शान
वन विभाग ने साफ कहा है कि मखी जैसी कहानी ही दिखाती है कि यह प्रोजेक्ट सही दिशा में आगे बढ़ रहा है. उनकी मानें तो आने वाले समय में यह पूरी तरह से तय कर देगा कि भारत फिर से अपने चीतों की पहचान हासिल करेगा.
कुनो के जंगल अब सिर्फ़ मध्यप्रदेश की शान नहीं, बल्कि पूरे देश और दुनिया के लिए एक प्रेरणा बन चुके हैं.

