‘रिश्ता नया, पासवर्ड वही’…लोग अपने एक्स के नाम पर क्यों रखते हैं पासवर्ड?

Anoop

December 17, 2025

कितनी अजीब बात है न, पासवर्ड जैसी चीज जो पूरी तरह प्राइवेट और सीक्रेट होनी चाहिए, उसमें भी लोग अपने पुराने रिलेशनशिप्स की परछाईं बचाकर रखते हैं. रोज फोन अनलॉक करते हुए, मेल लॉगिन करते समय या फिर लैपटॉप ऑन करते हुए वे मुंह से नहीं तो दिमाग में तो अपनी एक्स-गर्लफ्रेंड, एक्स-बॉयफ्रेंड या क्रश का नाम दोहरा ही लेते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं चेक दुनिया में एक्स के नाम को काफी कमजोर पासवर्ड माना जाता है लेकिन साइकोलॉजी के हिसाब से ये आपकी मेमोरी, अटैचमेंट और अधूरे इमोशन्स की कहानी बयां करता है.

हो सकता है आपने या आपके कई जान पहचान वालों ने अपने एक्स के नाम को ही अलग-अलग चीजों का पासवर्ड बना रखा हो. हालांकि एक्स के नाम पर पासवर्ड रखने के पीछे का साइकोलॉजिकल कारण क्या हो सकता है, इस बारे में आज हम आपको बताएंगे.

एक्स के नाम का पासवर्ड रखने के 3 कारण

Aajtak Podcast के मुताबिक, इसका जवाब सीधा है. पासवर्ड सिर्फ टेक्निकल नहीं बल्कि एक इमोशनल एंकर भी होता है. रिलेशनशिप में जब कोई बहुत करीब होता है, उसका नाम दिमाग में गहराई से बैठ जाता है. ब्रेकअप के बाद भी वही नाम तुरंत याद आता है इसलिए कई लोग उसे पासवर्ड बना देते हैं. यह तीन कारणों से होता है. इमोशनल मेमोरी, नॉस्टैल्जिया और अनफिनिश्ड अटैचमेंट और कंट्रोल या पॉवर डायनेमिक्स.

आसान शब्दों में समझें तो पासवर्ड बनाते समय दिमाग लॉजिक से नहीं, दिल से काम करता है इसलिए एक्स का नाम मेमोरीज के साथ पासवर्ड में आ जाता है.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?

दिमाग ऑटो-पायलट पर भी उसे भूलता नहीं, लेकिन साइबर सिक्योरिटी की नजर से ये बेहद कमजोर और खतरनाक पासवर्ड माने जाते हैं. एक्स के नाम को पासवर्ड बनाने के पीछे कुछ इमोशनली कारण भी होते हैं जो जानना काफी जरूरी है.

जल्द याद आने वाली मेमोरीज

Cosmopolitan.in का कहना है, साइकोलॉजिस्ट्स मानते हैं पासवर्ड अक्सर वही बनते हैं जो सबसे ऑटोमेटिकली दिमाग में आता है, जैसे किसी का नाम, पुराना क्रश या कोई याद.​ लंबे समय तक लोग रिलेशनशिप में एक ही पैटर्न पर चलते हैं इसलिए एक्स का नाम उनकी मसल्स मेमोरी की तरह हो जाता है और ब्रेकअप के बाद भी वह उनके दिमाग से नहीं निकल पाता.

अटैचमेंट और ब्रेकअप 

Attachmentproject.com के मुताबिक, हमारे एक्स अक्सर एक अटैचमेंट फिगर होते हैं. ब्रेकअप के बाद दिमाग उस रिश्ते से जुड़े सिंबल्स (नाम, समय, डेट, जगह) को छोड़ने में टाइम लेता है.

Marriage.com के मुताबिक,​ जो लोग ब्रेकअप के बाद बार‑बार एक्स के बारे में सोचते हैं वे अनजाने में पासवर्ड भी उसी के नाम का बना लेते हैं ताकि वे उसकी यादों में रहे.

कंट्रोल, सीक्रेट लिंक और पैसिव‑एग्रेसन

Talktoangel.com के मुताबिक, कुछ मामलों में एक्स के नाम का पासवर्ड बनाना एक सीक्रेट ‘इमोशनल लिंक’ बनाए रखने जैसा होता है. जैसे खुद से ही कहना कि ये चैप्टर अभी पूरी तरह बंद नहीं हुआ है.​

ToiTime का कहना है, कुछ पार्टनर जानबूझ कर एक्स या पुराने क्रश का नाम पासवर्ड रखते हैं ताकि यह अपने वर्तमान पार्टनर के खिलाफ पैसिव‑एग्रेसिव रिएक्शन या अंदर ही अंदर नफरत जैसा लगे.

नेगेटिव इमोशंस को छुपाने की कोशिश

Attachmentproject.com के मुताबिक, अवॉइडेंट या इमोशन दबाने वाले लोग अक्सर ब्रेकअप के दर्द को सीधे फेस करने के बजाय ऐसे इनडायरेक्ट रूट लेते हैं. वे ऊपर से नॉर्मल, भीतर से एक्स की याद किसी न किसी बहाने जिंदा रखने की कोशिश करते हैं.​ इस तरह का हिडन कनेक्शन दिमाग को थोड़ी देर के लिए कम्फर्ट देता है लेकिन आगे चलकर मूवऑन प्रोसेस को धीमा कर देता है.

सीक्रेट स्टोरी और आइडेंटिटी का हिस्सा 

Cosmopolitan.in के मुताबिक, कुछ लोगों के लिए पासवर्ड उनकी पर्सनल स्टोरी, फैंटेसी या रिलेशनशिप हिस्ट्री का प्राइवेट कोड बन जाता है जो बाहर से दिखता नहीं लेकिन भीतर से उन्हें अच्छा महसूस कराता है.​ जब रिश्ता बहुत इंटेंस या फर्स्ट लव टाइप रहा हो तो एक्स का नाम पासवर्ड में रखना उस रिश्ते को अपनी आइडेंटिटी में हमेशा के लिए फिक्स कर देने जैसा भी महसूस हो सकता है.

‘पासवर्ड कभी प्यार की निशानी नहीं होना चाहिए, उसे हमेशा सेफ्टी की नजर से देखें.’

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