जसम का 10वां राज्य सम्मेलन शनिवार और रविवार को लखनऊ के नेहरू युवा केंद्र में हुआ
लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आज़ादी पर चिंता, जसम राज्य सम्मेलन में उठा स्वर
लखनऊ । जन संस्कृति मंच (जसम) का दसवां राज्य सम्मेलन शनिवार और रविवार को लखनऊ के नेहरू युवा केंद्र में हुआ। सम्मेलन में प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आए प्रतिनिधियों ने कहा कि आज समाज में बढ़ती विभाजन और दबाव की राजनीति के खिलाफ एकजुट होकर लड़ने की जरूरत है। सभी ने मिलकर प्रतिरोध और साझी संस्कृति को मजबूत करने का संकल्प लिया।
सम्मेलन के दूसरे दिन संगठन को मजबूत करने और नई राज्य कमेटी के चुनाव पर चर्चा हुई। इसमें जयप्रकाश धूमकेतु को अध्यक्ष और कौशल किशोर को कार्यकारी अध्यक्ष चुना गया। रामनरेश राम को सचिव और फरजाना महदी को उप सचिव बनाया गया। सम्मेलन के दौरान गीत, नज़्म और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए, जिससे माहौल जीवंत बना रहा। अलग-अलग सत्रों का संचालन रामायण राम और शांतम निधि ने किया। कार्यक्रम स्थल की सजावट में प्रो. धर्मेंद्र, अंकुर, विनीता और लखनऊ आर्ट्स कॉलेज के छात्रों का सहयोग रहा।
उद्घाटन सत्र में वरिष्ठ पत्रकार परांजय गुहा ठाकुरता और संस्कृति कर्मी शम्सुल इस्लाम ने अपने विचार रखे। सम्मेलन में आए अतिथियों और प्रतिनिधियों का स्वागत प्रो. रूपरेखा वर्मा ने किया। अध्यक्षीय भाषण में प्रो. अवधेश प्रधान ने कहा कि सच्ची संस्कृति वही होती है जो समय के साथ आगे बढ़ती है। उन्होंने कहा कि आज सोचने और सवाल पूछने की आज़ादी पर खतरा बढ़ रहा है, जो चिंता का विषय है।

परांजय गुहा ठाकुरता ने कहा कि देश में सत्ता और बड़े पूंजीपतियों का गठजोड़ बढ़ता जा रहा है और आम लोगों की आवाज़ को दबाया जा रहा है। शम्सुल इस्लाम ने कहा कि इतिहास और साहित्य को समझे बिना प्रतीकों का इस्तेमाल समाज में गलत संदेश फैलाता है। लखनऊ विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति प्रो. रूपरेखा वर्मा ने कहा कि लोकतंत्र गंभीर दौर से गुजर रहा है और इससे निपटने के लिए सिर्फ बैठकों से काम नहीं चलेगा, बल्कि जनता को आगे आना होगा। सम्मेलन में शामिल इप्टा, जलेस और प्रलेस जैसे संगठनों ने जसम के साथ मिलकर संघर्ष करने की बात कही। कार्यक्रम के अंत में साहित्यकार शिवमूर्ति ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार जताया।

