- पूर्वांचल व दक्षिणांचल डिस्कॉम के निजीकरण के विरोध में चरणबद्ध आंदोलन, 8 जनवरी से बिजली आपूर्ति करेंगे कर्मी
- 400 दिन पूरे होने पर जनवरी से काली पट्टी, 22 जनवरी को लखनऊ में बिजली कर्मियों की प्रदेशव्यापी विशाल रैली
लखनऊ। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के निर्णय तथा आंदोलन के फलस्वरूप बिजली कर्मियों पर की जा रही उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों के विरोध में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने 1 जनवरी से व्यापक आंदोलन का ऐलान किया है। संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया कि आंदोलन के दौरान बिजली कर्मी उपभोक्ताओं एवं किसानों की समस्याओं को प्राथमिकता पर निस्तारित करेंगे तथा सरकार की बिजली बिल राहत योजना में पूर्ण सहयोग करेंगे।
संघर्ष समिति की यह बैठक रविवार को लखनऊ में हुई, जिसमें प्रदेशभर के संयोजक एवं सह-संयोजक शामिल रहे। समिति से जुड़े विभिन्न श्रम संघों एवं सेवा संगठनों के केंद्रीय पदाधिकारी भी बड़ी संख्या में मौजूद रहे। संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार बिजली कर्मी आगामी 8 जनवरी से 22 जनवरी तक कार्यालय समय के बाद बिजली आपूर्ति के अतिरिक्त कोई अन्य कार्य नहीं करेंगे। 22 जनवरी को लखनऊ में बिजली कर्मचारियों, संविदा कर्मियों एवं अभियंताओं की प्रदेशव्यापी विशाल रैली कर आंदोलन के अगले चरण की घोषणा की जाएगी।
आंदोलन के 400 दिन पूरे होने के अवसर पर 1 जनवरी को प्रदेशभर के जिलों एवं परियोजनाओं पर बिजली कर्मी पूरे दिन काली पट्टी बांधकर काम करेंगे। कार्यालय समय के बाद विरोध प्रदर्शन करेंगे। निजीकरण और उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों के विरोध में 1 से 8 जनवरी तक प्रतिदिन ड्यूटी के दौरान काली पट्टी बांधी जाएगी। 8 जनवरी को सभी डिस्कॉम मुख्यालयों एवं परियोजनाओं पर बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त निजीकरण के विरोध में जनपदों एवं परियोजनाओं पर पूर्व से चल रहे धरना-प्रदर्शन पूर्ववत जारी रहेंगे।
संघर्ष समिति ने बैठक में बिजली कर्मियों पर की गई एवं की जा रही उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों पर गहरा रोष व्यक्त किया। समिति ने बताया कि निजीकरण के विरोध के कारण बीते एक वर्ष में पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन द्वारा अत्यंत अल्प वेतन भोगी हजारों संविदा कर्मचारियों को नौकरी से बाहर कर दिया गया, हजारों कर्मचारियों का प्रशासनिक आधार पर दूरस्थ स्थानों पर स्थानांतरण किया गया, जिनमें महिला कर्मी भी शामिल हैं।
फेसियल अटेंडेंस के नाम पर कई कर्मियों का वेतन महीनों तक रोका गया है। कार्यालय समय के उपरांत हुई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से अलग होने पर 87 अधिशासी अभियंताओं को चार्जशीट देकर उनकी पदोन्नति एवं अन्य देयक रोक दिए गए हैं। इसके अलावा बिजली कर्मियों को अधिनियम के तहत मिलने वाली रियायती बिजली सुविधा समाप्त करने के उद्देश्य से उनके आवासों पर जबरन स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं। वहीं संघर्ष समिति के वरिष्ठ पदाधिकारियों पर डिस्प्रोपोर्सनेट एसेट के झूठे मामलों में एफआईआर दर्ज कर उत्पीड़न किया जा रहा है।
संघर्ष समिति ने शासन-प्रबंधन से मांग की है कि निजीकरण के निर्णय को तत्काल वापस लिया जाए तथा सभी उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों को समाप्त किया जाए, अन्यथा आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

