संदिग्ध अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग को लेकर डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ करेगा प्रदेशव्यापी आंदोलन

Anoop

December 7, 2025
  • कई बार शिकायतों के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई, भ्रष्ट अधिकारियों का बढ़ता मनोबल बना आंदोलन का कारण
  • मुरादाबाद, देवरिया व श्रावस्ती के मामलों ने पकड़ा तूल, संघ ने दी प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी

लखनऊ। डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ, लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) उत्तर प्रदेश की उच्चाधिकार समिति की बैठक हुई। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि विभाग में भ्रष्टाचार के आरोपी एवं सत्यनिष्ठा संदिग्ध अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग को लेकर शीघ्र ही प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा।

बैठक में संघ पदाधिकारियों ने बताया कि संघ द्वारा कई बार उच्चाधिकारियों को पत्र लिखकर ऐसे अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इससे प्रदेश भर के डिप्लोमा इंजीनियर्स में भारी आक्रोश व्याप्त है। वक्ताओं ने कहा कि कार्रवाई न होने से भ्रष्ट अधिकारियों का मनोबल बढ़ रहा है, जिससे विभाग में भ्रष्टाचार की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिल रहा है और सरकार व विभाग की छवि भी धूमिल हो रही है। साथ ही ईमानदार अवर अभियंता और सहायक अभियंता मानसिक दबाव में कार्य करने को विवश हैं। उच्चाधिकार समिति ने इंजीनियर एन. डी. द्विवेदी, प्रदेश अध्यक्ष, डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ (लोनिवि) की अध्यक्षता में यह प्रस्ताव पारित किया कि जब तक संदिग्ध अधिकारियों के विरुद्ध ठोस व निष्पक्ष कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

मुरादाबाद प्रकरण

बैठक में मुरादाबाद जनपद के अधिशासी अभियंता कुलदीप संत का मामला प्रमुखता से उठाया गया। प्रमुख अभियंता (विकास) एवं विभागाध्यक्ष द्वारा उनकी सत्यनिष्ठा संदिग्ध घोषित की जा चुकी है। आयुक्त सहारनपुर मंडल द्वारा इन्हें अयोग्य व अनुभवहीन मानते हुए सहारनपुर से हटाने की संस्तुति की गई थी। सरकार की स्थानांतरण नीति के प्रस्तर-4 के अनुसार संदिग्ध सत्यनिष्ठा वाले कार्मिकों की संवेदनशील पदों पर तैनाती निषिद्ध है, इसके बावजूद उन्हें मुरादाबाद जैसे संवेदनशील खंड में तैनात किया गया तथा दो अन्य खंडों का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया।

देवरिया प्रकरण

देवरिया जनपद के अधिशासी अभियंता अनिल जाटव पर लगभग 6 करोड़ रुपये का फर्जी बजट मांगने तथा 2.5 करोड़ रुपये के 34 फर्जी सप्लाई ऑर्डर जारी करने के गंभीर आरोप हैं। इसके बावजूद उन्हें न केवल पद पर बनाए रखा गया, बल्कि अन्य महत्वपूर्ण खंड का चार्ज भी दिया गया। श्रावस्ती जनपद के अधिशासी अभियंता सुनील कुमार पर सहायक अभियंता के हस्ताक्षर बिना करवाए करोड़ों रुपये के बिल पास कर भुगतान कराने के आरोप हैं। इस प्रकरण में महालेखाकार (AG) का ऑडिट-पैरा भी बन चुका है। उत्तर प्रदेश ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी द्वारा भी इस अनियमितता पर पत्र लिखा गया है।

इतना ही नहीं, चिकित्सा अवकाश के दौरान सरकारी वाहन का निजी उपयोग किए जाने तथा वाहन के किराये में नियमानुसार कटौती न कराने का भी आरोप है। अधीनस्थ दो सहायक अभियंताओं को 16 माह से वेतन न देने एवं कर्मचारियों के उत्पीड़न के आरोप भी लगाए गए हैं। जिलाधिकारी एवं मुख्य विकास अधिकारी श्रावस्ती द्वारा इनके विरुद्ध पत्राचार किया गया तथा जिलाधिकारी ने इनका वेतन भी रोक दिया है, इसके बावजूद अब तक कोई विभागीय कार्रवाई नहीं हुई। डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही इन सभी मामलों में निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई नहीं की गई, तो संघ प्रदेश स्तर पर चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेगा, जिसकी पूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

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