उप्र की पहचान बन चुकी ’एक जनपद एक उत्पाद योजना’आगामी चरण ओडीओपी-2.0 के माध्यम से स्थानीय उद्योग,स्वरोजगार और निर्यात को नई ऊंचाई देने के लिए तैयार : मुख्यमंत्री

Anoop

December 5, 2025

स्थानीय उद्योग, स्वरोजगार व निर्यात को नई ऊँचाई देने का लक्ष्य, ओडीओपी-2.0 की समीक्षा

’एक जनपद–एक व्यंजन’ से प्रदेश की खाद्य पहचान को मिलेगा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मंच

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश की पहचान बन चुकी ’एक जनपद एक उत्पाद’ (ओडीओपी) योजना अब अपने अगले चरण ओडीओपी-2.0 के माध्यम से स्थानीय उद्योग, स्वरोजगार और निर्यात को नई ऊँचाई देने के लिए पूरी तरह तैयार है। बदलते वैश्विक बाजार, आधुनिक उपभोक्ता मांग, तकनीकी उन्नयन, गुणवत्ता और पैकेजिंग की नई आवश्यकताओं को देखते हुए ओडीओपी को अब और अधिक व्यापक, व्यावसायिक और परिणामोन्मुखी स्वरूप में आगे बढ़ाया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश के पारम्परिक उत्पाद बड़े बाजार, निर्यात और स्थायी रोजगार का मजबूत आधार बनें।

मुख्यमंत्री आज अपने सरकारी आवास पर आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में ओडीओपी-2.0 की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ओडीओपी-2.0 केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि यह स्थायी रोजगार सृजन, स्थानीय उद्यमिता को मजबूती और निर्यात विस्तार का सशक्त माध्यम बने। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि पहले चरण में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले उद्यमियों और इकाइयों को विशेष प्रोत्साहन दिया जाए, ताकि वे अपने व्यवसाय को और अधिक विस्तार दे सकें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक जनपद की विशिष्ट खाद्य परम्परा को संगठित पहचान देने की दिशा में एक जनपद–एक व्यंजन’ (ओडीओसी) की अवधारणा को साकार किया जाना चाहिए। यह योजना प्रदेश की सांस्कृतिक आत्मा से जुड़ी हुई होगी। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि प्रदेश के हर क्षेत्र में कुछ न कुछ विशेष खान-पान परम्पराएँ हैं—कहीं हलवा प्रसिद्ध है तो कहीं दालमोठ। इन विशिष्ट व्यंजनों की मैपिंग कर उनकी गुणवत्ता, स्वच्छता, पैकेजिंग, ब्राण्डिंग और विपणन को सशक्त किया जाए। ’ओडीओपी’ और ’ओडीओसी’ योजनाएँ मिलकर उत्तर प्रदेश को ’लोकल से ग्लोबल’ की दिशा में नई गति देंगी।

बैठक में मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया कि वर्ष 2018 में प्रारम्भ ओडीओपी योजना आज उत्तर प्रदेश के निर्यात और स्थानीय उद्योगों की रीढ़ बन चुकी है। अब तक 1.25 लाख से अधिक टूलकिट, 6 हजार करोड़ रुपये से अधिक का ऋण वितरित किया जा चुका है। 8 हजार से अधिक उद्यमियों को प्रत्यक्ष विपणन सहायता दी गई है। प्रदेश में अब तक 30 साझा सुविधा केन्द्र (कॉमन फैसिलिटी सेंटर) स्वीकृत किए जा चुके हैं और 44 ओडीओपी उत्पादों को जियो-टैग प्राप्त हो चुका है। ओडीओपी उत्पाद आज प्रतिष्ठित ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं तथा राज्य के कुल निर्यात में इनका योगदान 50 प्रतिशत से अधिक हो चुका है। यह योजना लगातार दूसरी बार राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त कर चुकी है।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि ओडीओपी से जुड़े कॉमन फैसिलिटी सेंटरों को और अधिक उपयोगी बनाया जाए। इन केंद्रों में विशेषज्ञों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए, जिससे छोटे उद्यमियों को तकनीकी परामर्श, डिज़ाइन, पैकेजिंग और उत्पादन से जुड़ा पूरा सहयोग एक ही स्थान पर सुलभ हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि ओडीओपी उत्पादों को केवल पारम्परिक बाजारों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उन्हें बड़े रिटेल नेटवर्क और आधुनिक बाजारों से जोड़ा जाए। देशभर में स्थापित हो रहे यूनिटी मॉल्स में ओडीओपी उत्पादों के लिए विशेष केन्द्र बनाए जाएँ।

मुख्यमंत्री को यह भी बताया गया कि ओडीओपी उत्पादों की गुणवत्ता और पहचान को वैश्विक स्तर पर और मजबूत करने के लिए प्रमाणन तथा ब्राण्ड वैल्यू प्रदान की जाएगी, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में उत्तर प्रदेश के उत्पादों की विशिष्ट पहचान बन सके।

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