- सोनचिरैया संस्था 6–7 दिसंबर को करेगी ‘देशज’ महोत्सव के 5वां संस्करण 7 को
- उत्सव से पहले कलाकारों की भव्य नौकायात्रा ने बिखेरा सांस्कृतिक रंग
लखनऊ। लोक संस्कृति से सराबोर दो दिवसीय महोत्सव ‘देशज’ का भव्य आयोजन गोमतीनगर स्थित लोहिया पार्क में 6 और 7 दिसंबर को किया जाएगा। अपनी स्थापना के 15 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर सोनचिरैया संस्था ‘देशज’ के पांचवें संस्करण का आयोजन लोहिया पार्क के मुक्ताकाशी मंच पर कर रही है। महोत्सव के पूर्व शुक्रवार को हनुमत धाम मंदिर में आयोजित प्रेसवार्ता के उपरांत गोमती नदी से कलाकारों की भव्य नौका शोभायात्रा निकाली गई। विभिन्न राज्यों से आए लोक कलाकारों ने पारंपरिक वेशभूषा, वाद्यों और रंग-बिरंगे स्वरूप में नौकाओं पर सवार होकर लखनऊ वासियों को देशज महोत्सव में सहभागी बनने का सजीव आमंत्रण दिया।
संस्था की प्रमुख मालिनी अवस्थी ने बताया कि सोनचिरैया के 10 वर्ष पूर्ण होने पर ‘देशज’ की शुरुआत की गई थी, जिसे दर्शकों के अपार स्नेह ने संस्था का वार्षिक अनिवार्य आयोजन बना दिया। उन्होंने कहा कि इस वर्ष दो विशेष आकर्षण हैं—पहली, कलाकारों की यह अनूठी नौकायात्रा, जो कला और जीवन की सतत गतिशीलता का प्रतीक है, और दूसरी, विभिन्न राज्यों की दुर्लभ लोक कलाओं की प्रस्तुतियां। इस वर्ष केरल से प्रस्तुत होने वाला थेय्यम विशेष आकर्षण रहेगा।
इसके अतिरिक्त मिजोरम का चेरो बांस नृत्य, राजस्थान का घूमर, पंजाब का गिद्दा, छत्तीसगढ़ का गोंड मारी (गौर नृत्य), महाराष्ट्र का सांगी मुखौटा नृत्य और गुजरात का दांगी नृत्य दर्शकों का मन मोहेंगे। राजस्थान से लोकगायक कुतले खां राजस्थानी संगीत की रंगत बिखेरेंगे। महोत्सव का समापन बिहार के भिखारी ठाकुर की कालजयी कृति ‘बिदेसिया’ के मंचन से होगा, जिसका निर्देशन राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के संजय उपाध्याय ने किया है।
प्रेसवार्ता के दौरान मोहिनीअट्टम की प्रसिद्ध कलाकार जयप्रभा मेनन ने थेय्यम के बारे में बताया कि यह केवल नृत्य नहीं, बल्कि एक पवित्र अनुष्ठान है, जो केरल में अक्टूबर से मार्च तक किया जाता है। विशिष्ट मुखौटे, पौराणिक मेकअप और देवी-देवताओं के आवाहन के साथ यह लोकविश्वास की जीवंत परंपरा है। उन्होंने कहा कि थेय्यम में कलाकार देवस्वरूप माने जाते हैं और पूरी प्रस्तुति पूजा-पाठ के समान पवित्र वातावरण रचती है।

प्रेसवार्ता में असम के थिएटर कलाकार दयाल कृष्णनाथ, जगमोहन रावत सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति और कलाकार उपस्थित रहे। प्रेसवार्ता के बाद निकाली गई नौका शोभायात्रा में कुल 10 सजी-धजी नावों ने देश के विभिन्न प्रदेशों की लोक-संस्कृति को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। इन नावों पर पंजाब का गिद्दा, महाराष्ट्र की सांगी मुखौटा परंपरा, गुजरात का दांगी, राजस्थान का घूमर, मिजोरम का चेरो बांस नृत्य और छत्तीसगढ़ के लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों ने गोमती तट को लोकरंग से सराबोर कर दिया। यह शोभायात्रा सोनचिरैया संस्था की 15 वर्षों की सांस्कृतिक यात्रा का प्रतीक बनी।

