- किसान और किसान मजदूर संगठन भी आर-पार के संघर्ष को तैयार
- 371वें दिन भी प्रदेशभर में जारी रहा बिजली कर्मियों का विरोध प्रदर्शन
लखनऊ। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में एक वर्ष से अधिक समय से जारी आंदोलन को और तेज करने के लिए आगामी 7 दिसंबर को लखनऊ में एक बड़ी बैठक आयोजित की जा रही है। इस बैठक में आंदोलन के अगले चरण के कार्यक्रमों की घोषणा की जाएगी। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों के अनुसार इस बैठक में प्रदेश के सभी जनपदों और परियोजनाओं के संयोजक व सह-संयोजक, साथ ही संघर्ष समिति से जुड़े सभी श्रम संघों और सेवा संगठनों के शीर्ष केंद्रीय पदाधिकारी शामिल होंगे।
संघर्ष समिति ने बताया कि बैठक में अब तक चले एक साल से अधिक के आंदोलन की विस्तृत समीक्षा की जाएगी और निजीकरण रद्द कराने तथा आंदोलन के दौरान बिजली कर्मियों पर की गई उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों को समाप्त कराने की रणनीति तय की जाएगी। समिति का आरोप है कि बीते एक वर्ष में प्रबंधन ने आंदोलन के चलते ऊर्जा निगमों में अघोषित आपातकाल जैसी स्थिति पैदा कर दी है। 25 हजार से अधिक संविदा कर्मियों को नौकरी से बाहर कर दिया गया, हजारों कर्मचारियों का दूरस्थ स्थानों पर तबादला किया गया, फेशियल अटेंडेंस के नाम पर महीनों तक वेतन रोका गया, पदाधिकारियों पर फर्जी एफआईआर दर्ज की गई और बिजली कर्मियों व पेंशनरों के घरों पर जबरन प्रीपेड मीटर लगाए गए।
इधर, संयुक्त किसान मोर्चा और किसान मजदूर मोर्चा ने भी बिजली के निजीकरण, इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल–2025 और प्रीपेड मीटर के विरोध में संघर्ष तेज करने का ऐलान कर दिया है। किसान मजदूर मोर्चा ने 5 दिसंबर को और संयुक्त किसान मोर्चा ने 8 दिसंबर को बड़े आंदोलन की घोषणा की है। संघर्ष समिति ने बताया कि 7 दिसंबर की बैठक में इन सभी मुद्दों को लेकर आगे की लड़ाई की स्पष्ट रूपरेखा तय की जाएगी। निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के 371वें दिन भी प्रदेश के सभी जनपदों में बिजली कर्मियों ने व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रखा।

