- मुख्य निर्वाचन अधिकारी को राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने बताई समस्याएं
- परिषद ने एसआईआर कार्य में सुधार के लिए निम्न प्रमुख सुझाव दिए हैं
लखनऊ। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के दौरान राजकीय कर्मचारियों और शिक्षकों के साथ अव्यावहारिक व्यवहार एवं अत्यधिक कार्यदबाव की शिकायतों पर राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद, उत्तर प्रदेश ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। परिषद ने भारत निर्वाचन आयोग एवं उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को पत्र लिखकर इस प्रक्रिया में सुधार के साथ समयसीमा बढ़ाने की मांग की है।
परिषद की उच्चाधिकार समिति — अध्यक्ष हरिकिशोर तिवारी, कार्यकारी अध्यक्ष इं. एन.डी. द्विवेदी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. नरेश कुमार, महामंत्री शिव वरन सिंह यादव और अपर महामंत्री प्रेम कुमार सिंह — ने प्रदेशभर से प्राप्त शिकायतों के आधार पर सुझाव भेजे हैं।
महामंत्री शिव वरन सिंह यादव ने बताया कि तीसरे श्रेणी के कार्मिकों और शिक्षकों पर इतना दबाव बनाया जा रहा है कि कई जगह कर्मचारियों ने तनाव में आत्मघाती कदम तक उठा लिए हैं। कई घटनाएं सार्वजनिक हुई हैं जबकि अन्य दबाववश सामने नहीं आ पा रहीं।
परिषद का कहना है कि कर्मचारी/शिक्षक अपने विभागीय कार्यों के लिए नियुक्त होते हैं और वे विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों — जैसे जनगणना, पशुगणना, महामारी नियंत्रण एवं आपदा कार्य — में भी सहयोग देते रहे हैं। वहीं निर्वाचन जैसी सतत प्रक्रिया के लिए पूर्णकालिक कार्मिकों की आवश्यकता होती है, लेकिन प्रशासन द्वारा उन्हें विभागीय दायित्वों के साथ अतिरिक्त कार्य देते हुए दिन-रात मानसिक दबाव डाला जा रहा है।
एसआईआर कार्य में सुधार के लिए निम्न प्रमुख सुझाव दिए हैं
परिषद की मुख्य मांगें— ऑनलाइन फीडिंग की समयसीमा 4 दिसंबर 2025 तक बढ़ाई जाए। प्रत्येक बूथ पर बीएलओ की सहायता हेतु कम से कम एक अतिरिक्त कर्मचारी/डाटा एंट्री ऑपरेटर उपलब्ध कराया जाए। प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा किए जा रहे अव्यावहारिक दबाव को रोका जाए। एसआईआर ड्यूटी में मृत्यु हुए कार्मिकों को 1 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता एवं आश्रित को सरकारी नौकरी की व्यवस्था की जाए। बीएलओ एवं पर्यवेक्षक की तैनाती व्यवस्था पर पुनर्विचार किया जाए। परिषद ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासनिक दबाव इसी प्रकार जारी रहा तो कर्मचारी अत्यधिक तनावग्रस्त होकर गंभीर कदम उठाने को विवश होंगे, जिस पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।

