- तमिलनाडु की उपेक्षा का आरोप, संसद के शीतकालीन सत्र में जवाब की मांग
चेन्नई। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और द्रमुक अध्यक्ष एम.के. स्टालिन ने केंद्र सरकार पर राज्य की वैध मांगों की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह ‘भेदभाव और विश्वासघात’ है और देश के सबसे बड़े लोकतंत्र होने के दावे के विपरीत है। उन्होंने कहा कि केंद्र को संसद के शीतकालीन सत्र में इन मुद्दों पर जवाब देना होगा। स्टालिन की अध्यक्षता में हुई द्रमुक सांसदों की बैठक में कई प्रस्ताव पारित किए गए जिनमें जीएसटी राजस्व बंटवारे, केंद्रीय कर पूल से आवंटन में कटौती और केंद्र प्रायोजित योजनाओं का बोझ राज्यों पर डालने को लेकर मोदी सरकार की आलोचना शामिल रही। बैठक में कोयम्बटूर और मदुरै में मेट्रो रेल परियोजनाओं को मंजूरी देने, रेलवे परियोजनाओं में भेदभाव समाप्त करने और सर्व शिक्षा अभियान के लिए 3548.22 करोड़ रुपये सहित मनरेगा के लंबित बकाये जारी करने की मांग की गई। इसके अलावा राज्यपाल कार्यालय के दुरुपयोग, शिक्षा के भगवाकरण को रोकने और पाक जलडमरूमध्य में मछुआरों के पारंपरिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए श्रीलंका से बातचीत का मामला भी उठाया गया।
