बिजली कर्मियों और अभियंता संगठनों ने इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल-2025 किया अस्वीकार, केंद्रीय मंत्री को भेजे कमेन्ट: बोले निजीकरण का कोई भी स्वरूप स्वीकार नहीं

Anoop

November 7, 2025

ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन, राष्ट्रीय फेडरेशन, नेशनल कोऑर्डिनेशन कमिटी आफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स ने किया कड़ा विरोध

केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल खट्टर को प्रेषित पत्र में लिखा गया है कि एनडीए सरकार में यह छठी बार है जब इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल लाया गया है

लखनऊ। ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन, बिजली कर्मियों के सभी राष्ट्रीय फेडरेशन और नेशनल कोऑर्डिनेशन कमिटी आफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स ने इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 को समग्रता में अस्वीकार्य बताते हुए केन्द्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल खट्टर को ड्राफ्ट बिल 2025 पर आज अपने कमेन्ट प्रेषित कर दिया है। केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल खट्टर को प्रेषित पत्र में लिखा गया है कि एनडीए सरकार में यह छठी बार है जब इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल लाया गया है। इसके पहले वर्ष 2014, वर्ष 2018, वर्ष 2020, वर्ष 2021 और वर्ष 2022 में कुल  5 बार इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल लाया जा चुका है और हर बार इसे व्यापक विरोध के चलते वापस लिया गया है।

 संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) 2025 पूर्व में ले गए पांच बिलों जैसा ही है और इसका उद्देश्य संपूर्ण पॉवर सेक्टर का निजीकरण करना है जो किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने बताया कि 09 दिसंबर 2021 को संयुक्त किसान मोर्चे के साथ हुए समझौते में तत्कालीन कृषि सचिव ने लिखित दिया था कि किसानों और स्टेक होल्डर्स को विश्वास में लिए बिना इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल नहीं लाया जाएगा यह उसका सरासर उल्लंघन है।

 संघर्ष समिति ने बताया कि बिल में सेक्शन 14, 42 और 43 के माध्यम से निजी कंपनियों को सरकारी क्षेत्र  के नेटवर्क का इस्तेमाल करने की अनुमति देना बैक डोर प्राइवेटाइजेशन है। विडंबना यह है कि सरकारी कंपनी नेटवर्क के परिचालन, अनुरक्षण, अपग्रेडेशन और उसके उच्चीकरण पर सारा पैसा खर्च करेगी और इस नेटवर्क का लाभ उठाकर पैसा कमाएंगी  प्राइवेट कंपनियां।

      ड्राफ्ट बिल में कई आपत्तिजनक बातें हैं किंतु सेक्शन 86 ई के माध्यम से  राज्य के विद्युत नियामक आयोग के सदस्यों को हटाने का अधिकार केंद्र सरकार को  देना सीधे-सीधे राज्य के अधिकार में दखल है। ध्यान रहे बिजली संविधान में समवर्ती सूची में है जिसका तात्पर्य होता है कि बिजली के मामले में केंद्र और राज्य सरकारों के बराबर के अधिकार है। इस संशोधन से राज्य सरकार के अधिकारों का सीधे हनन हो रहा है। इसी प्रकार संशोधन की धारा 166  ए में केंद्रीय इलेक्ट्रिसिटी काउंसिल बनाने का प्रावधान किया गया है। इस काउंसिल के माध्यम से केंद्र सरकार राज्यों को बिजली के मामले में निर्देश दे सकेगी। यह भी समवर्ती सूची में प्रदत्त राज्य सरकारों के अधिकार के विरुद्ध है।

      संघर्ष समिति ने कहा कि क्रॉस सब्सिडी समाप्त करने से  किसानों, गरीबों और घरेलू उपभोक्ताओं की बिजली की कीमतों में इतनी वृद्धि हो जाएगी कि वे उसे खरीद पाने में सक्षम नहीं होंगे और यह देश को लालटेन युग में ले जायेगी। संघर्ष समिति के आह्वान पर आज लगातार 344 वें दिन बिजली कर्मियों ने प्रदेश के समस्त जनपदों में पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के निर्णय के विरोध में व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रखा।

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