अपने रचनाकर्म के दौरान एक लेखक कितनी तकलीफों से गुजरता है, बहुत कम को पता होता है: अनिल मिश्र गुरू जी

Anoop

September 13, 2025

नाटककार सुशील कुमार सिंह की रंगयात्रा पर चर्चा, हुआ नाट्यपाठ

वाणी प्रकाशन ने किया सुशील कुमार सिंह की रंगमंचीय यात्रा पर आयोजन  

लखनऊ। नाटककार सुशील कुमार सिंह के नाटकों की घनीभूत लंबी फेहरिस्त है। राजनैतिक, सामाजिक और उत्कृष्ट रंगमंचीय कसावट के साथ व्यंग्य उनके नाटकों में देखे जा सकते हैं। सुशील जी का ‘अराउंड द वर्ल्ड’ नाटक वर्तमान परिप्रेक्ष्य में दुनियाभर की मौजूदा युद्ध विभीषिकाओं की स्थितियां दिखाई देती हैं। यह बातें लखनऊ के वरिष्ठ रंगकर्मी अनिल मिश्र गुरू जी ने शुक्रवार को कहीं। वे सुशील कुमार सिंह की व्यापक रंगमंचीय यात्रा पर बोल रहे थे। कार्यक्रम लखनऊ के बलरामपुर गार्डन में आयोजित दस दिवसीय राष्ट्रीय पुस्तक मेले में सुशील कुमार सिंह के नाटकों पर हुई चर्चा में बतौर वक्ता बोल रहे थे।

कार्यक्रम में प्रसिद्ध अभिनेता व रंगकर्मी डॉ अनिल रस्तोगी, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के उप निदेशक डॉ अशोक बनर्जी, वरिष्ठ नाटककार अनिल मिश्र गुरू जी, ललित सिंह पोखरिया, आलोक श्रीवास्तडॉ व पत्रकार राजवीर रतन ने वृहद चर्चा की। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ पत्रकार अरुण कुमार सिंह ने किया। कार्यक्रम में वाणी प्रकाशन के प्रतिनिधि अतुल महेश्वरी ने अतिथियों का स्वागत कर आभार जताया।

कार्यक्रम में आगे अनिल मिश्र गुरू जी ने कहा कि हमारे यहां नाट्यपाठ की समय-समय पर नाटककारों ने समृद्ध परंपरा विकसित की। अपने रचनाकर्म के दौरान एक लेखक कितनी तकलीफों से गुजरता है, बहुत कम को पता होता है। ‘काकोरी ट्रेन एक्शन’ की रचनाप्रक्रिया में कितनी बार उन्होंने पन्ने फाड़े होंगे, फिर लिखे होंगे। कैसे जूझकर उसकी रचनाप्रक्रिया साकार होती है। नाट्यकर्म आसान काम नहीं है। आज सोशल मीडिया पर हर तीसरा व्यक्ति साहित्यकार है। ऐसे दौर में जरूरत है कि नाटककार मौजूदा चुनौतियों को स्वीकार कर साहित्यिक के जरिए विसंगतियों को सामने लाए।

साहित्यप्रेमियों ने सुशील कुमार सिंह के चर्चित लोकप्रिय नाटकों के संवादों का नाट्यपाठ का आनंद लिया। पुस्तक मेले में सुशील कुमार सिंह के नाट्यांशों का पाठ किया। कार्यक्रम मेले के मुख्य मंच पर वाणी प्रकाशन की ओर से हुआ। डॉ अनिल रस्तोगी ने कहा कि सुशील कुमार सिंह मंचीय दृष्टिकोण से नाटक लिखते हैं। उनके लेखन निर्देशन में नाटकों के लगातार मंचन हुए। कई विश्वविद्यालयों में उनके नाटक पाठ्यक्रम का हिस्सा हैं। काकोरी ट्रेन एक्शन तादब्दी वर्ष पर उनके नाटक का भारतेंदु नाटक्य अकादमी के स्टूडेंट्स ने कई जगहों पर किया।

इंडिया इनसाइड पत्रिका के संपादक व वरिष्ठ पत्रकार, साहित्यकार अरूण कुमार सिंह ने कहा कि सुशील जी का नाटक ‘अराउंड द वर्ल्ड’ पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सुशील कुमार सिंह के वृहद दृष्टिकोण को दुनियाभर में मौजूदा राजनौतिक उथल-पुथल में युद्ध विभीषिकाओं की तस्वीर पेश करते नाटक ‘अराउंड द वर्ल्ड’ को पढ़ और देखकर जाना जा सकता है। नाटकों की वापसी हो रही है। लोग टिकट लेकर नाटक देख रहे हैं। सुशील जी के नाटक मौजूं हैं। उनके नाटक समय के पार हैं।

ललित सिंह पोखरिया ने कहा कि बतौर संजीदा लेखक सुशील जी का कार्य सुविख्यात है। इनके सरोकारों, विशेषताओं का सामने आना जरूरी है। मेरा उनसे परिचय वर्ष 1984 से है। जब मैं भारतेंदु नाटक अकादमी का छात्र था। भारतेंदु नाट्य अकादमी के निदेशक और नाट्य निर्देशक पदमश्री राजबिसारिया साहब ने सुशील जी को बतौर अतिथि वक्ता अकादमी में आमंत्रित किया था। अकादमी के रंगमंडल में सुशील जी के नाटक ‘बेबी तुम नादान’ व ‘अंधेरे के राही’ में अभिनय किया। नाटककार आलोक कुमार श्रीवास्तव, पत्रकार राजवीर रतन ने भी सुशील जी के रंगकर्म पर अपने अनुभव साझा किए।          

डॉ अशोक बनर्जी ने साहित्यकार अमृतलाल नागर, भगवती चरण वर्मा और ज्ञानदेव अग्निहोत्री की समय-समय पर नाटककार सुशील कुमार सिंह के कृतित्व-व्यक्तित्व पर की गई महत्वपूर्ण टिप्पणियों को पढ़कर सुनाया। उन्होंने कहा कि रंगमंच के महागुरु और प्रसिद्ध नाट्य निर्देशक इब्राहिम अल्काज़ी ने एक बार तो सुशील जी से घर पर आमंत्रित कर उन्होंने मृच्छकटिकम-मिट्टी की गाड़ी का रूपांतरण कराया था। जहां इसके लिए इब्राहिम अल्काज़ी जी ने सुशील जी के लिए आवास, भोजन जैसे बंदोबस्त भी करवाए थे। इससे सुशील जी के कृतित्व-व्यक्तित्व को सहज जाना जा सकता है।  

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