स्वर, ताल और साधना का अलौकिक संगम: UPSNA की प्रादेशिक संगीत प्रतियोगिता शुरू

Anoop

December 2, 2025
  • आज तबला और पखावज के ‘अवनद्ध वाद्यों’ की होगी जोरदार प्रतिस्पर्धा
  • प्रादेशिक संगीत प्रतियोगिता  2025-26 में 23 केंद्रों पर 1100 प्रतिभागियों ने भाग लिया

लखनऊ। उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी (UPSNA) द्वारा आयोजित प्रादेशिक संगीत प्रतियोगिता 2025-26 का तीन दिवसीय प्रथम चरण राजधानी लखनऊ के संत गाडगे जी ऑडिटोरियम में भव्यता के साथ शुरू हो गया है। सोमवार, 1 दिसंबर को स्वर वाद्यों के मधुर वादन के साथ प्रतियोगिता का आगाज़ हुआ, जिसमें प्रदेश भर की प्रतिभाओं ने अपनी कला का प्रदर्शन किया।

2 दिसंबर को होगी अवनद्ध वाद्यों की चुनौती। प्रतियोगिता के दूसरे दिन, मंगलवार 2 दिसंबर को अवनद्ध वाद्यों (Percussion Instruments) की प्रतिस्पर्धा होगी। इसमें तबला और पखावज जैसे ताल वाद्यों के बाल, किशोर और युवा वर्गों के प्रतिभागी अपनी थाप और ताल की महारत दिखाएंगे। इसके बाद, अंतिम दिन, 3 दिसंबर को कथक नृत्य की प्रतिस्पर्धा होगी।

पहले दिन गूंजा विचित्र वीणा का दुर्लभ राग

प्रतियोगिता के उद्घाटन सत्र में, विचित्र वीणा जैसे दुर्लभ वाद्य पर बाल वर्ग के प्रतिभागी शिवांश सिंह (वाराणसी) ने जब राग भूपाली सुनाया तो प्रेक्षागृह तालियों से गूंज उठा। वहीं, प्रयागराज के अशित सांई ने मैंडोलिन पर राग अहीर भैरव सुनाकर अपनी प्रबल दावेदारी पेश की। किशोर वर्ग में ग्रेटर नोएडा के आंजनेय जोशी ने बांसुरी पर राग सरस्वती का कुशल वादन किया।

युवाओं में संगीत के बढ़ते संस्कार

अकादमी के अध्यक्ष प्रो. जयंत खोत ने बताया कि यह प्रतियोगिता बच्चों में बाल्यावस्था से ही नृत्य, गायन और वादन के संस्कारों को रोपित करती है। उन्होंने कहा कि प्रतियोगिता की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस साल दो नए केंद्र लखीमपुर और फर्रुखाबाद जोड़े गए हैं और 2025-26 में 23 केंद्रों पर लगभग 1100 प्रतिभागियों ने भाग लिया है। प्रतियोगिता का दूसरा सत्र गायन का होगा, जो 8 से 11 दिसंबर तक आयोजित किया जाएगा। 2 दिसंबर: अवनद्ध वाद्य (तबला एवं पखावज), 3 दिसंबर: कथक नृत्य प्रतिस्पर्धा, 8 से 11 दिसंबर: गायन प्रतियोगिताएँ (दूसरा सत्र) में होंगे।  

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