सुर साधना में भक्ति रस की अविरल धारा, कुड़िया घाट हुआ भक्तिमय

Prashant

January 11, 2026

डॉ. अरुण मिश्रा की भजन गायकी पर झूमे श्रद्धालु, तबले की थाप से सजी संध्या

‘अच्युतम केशवम…’ से आरंभ हुई साधना, हर सुर में झलकी आध्यात्मिक चेतना

लखनऊ। उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग की ओर से आयोजित सुर साधना कार्यक्रम के अंतर्गत आज कुड़िया घाट पर भक्ति, संगीत और साधना का अद्भुत संगम देखने को मिला। प्रख्यात तबला वादक एवं भजन गायक डॉ. अरुण मिश्रा ने अपनी सुमधुर भजन गायकी से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक आनंद में सराबोर कर दिया। गंगा तट पर बहती शीतल वायु और सुरों की लहरियों के बीच पूरा वातावरण भक्तिरस से ओतप्रोत हो उठा।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे, जो एक-एक भजन के साथ मानो ध्यान और भक्ति की गहराइयों में उतरते चले गए। डॉ. अरुण मिश्रा के साथ हारमोनियम पर सम्राट राजकुमार और ढोलक पर रवीश तिवारी ने सशक्त एवं संवेदनशील संगत की। संगतकर्ताओं के सुर और ताल ने भजन गायकी को और अधिक प्रभावशाली बना दिया, जिससे श्रोता सहज ही भक्ति भाव में डूबते चले गए।

कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. अरुण मिश्रा ने अपने चर्चित और अत्यंत लोकप्रिय भजन अच्युतम केशवम कृष्ण दामोदरम…’ से किया। इसके पश्चात उन्होंने एक से बढ़कर एक सुमधुर और भावपूर्ण भजनों की प्रस्तुति दी। हर भजन के साथ श्रद्धालुओं का मन प्रभु स्मरण में लीन होता गया। सुर, ताल और भाव की त्रिवेणी ने कुड़िया घाट को एक आध्यात्मिक साधना स्थल में परिवर्तित कर दिया, जहां संगीत केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि आत्मा को छू लेने वाली अनुभूति बन गया।

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