30 जनवरी से 3 फरवरी तक तीन ऐतिहासिक स्थलों पर सजेगा महिंद्रा सनतकदा उत्सव
110 स्टॉल, 100 से ज्यादा कारीगर और कलाकारों के लाइव आर्ट डेमो होंगे आकर्षण
लखनऊ। नवाबी तहज़ीब और सांस्कृतिक विविधता के लिए मशहूर लखनऊ एक बार फिर कला, शिल्प और विरासत के उत्सव का गवाह बनेगा। 30 जनवरी से 3 फरवरी तक आयोजित होने वाले 5 दिवसीय महिंद्रा सनतकदा लखनऊ फेस्टिवल सीज़न-17 में इस बार अवधी और बंगाली संस्कृति की भव्य झलक देखने को मिलेगी। यह फेस्टिवल सफ़ेद बारादरी, राजा रामपाल सिंह पार्क और अमीरुद्दौला पब्लिक लाइब्रेरी में आयोजित किया जाएगा।
फेस्टिवल स्थलों को बांस और लकड़ी के लैंप, रंग-बिरंगी पतंगों, डोरियों, शीशों और आकर्षक लाइटिंग से सजाया जाएगा। प्रवेश द्वार को खासतौर पर बंगाली संस्कृति की झलक देने वाले पंडाल के रूप में डिजाइन किया जाएगा, जो दर्शकों को कोलकाता के दुर्गा पूजा पंडालों की याद दिलाएगा।
शॉपिंग और हस्तशिल्प के शौकीनों के लिए फेस्टिवल में 110 स्टॉल लगाए जाएंगे, जहां अवधी और बंगाली कला का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। बंगाल की प्रसिद्ध जामदानी, कांथा, कदम हाथ और पट्टाचित्र जैसे प्रिंट उपलब्ध होंगे, वहीं अवधी परंपरा की आरी, जरदोजी, लहरिया और छटपटी कढ़ाई भी खास आकर्षण रहेंगी। इसके अलावा इकत, अजराख, मधुबनी, शिबरी, कलमकारी और बांधनी जैसे अन्य भारतीय प्रिंट भी हस्तशिल्प संग्रह का हिस्सा होंगे।
ज्वेलरी सेक्शन में मोती, कीमती पत्थर, आदिवासी, ऑक्सीडाइज्ड, चांदी और जंक ज्वेलरी के साथ-साथ अफगानी ज्वेलरी और जयपुरी पटवा ज्वेलरी भी उपलब्ध रहेगी। फेस्टिवल में लाइव आर्ट डेमो स्टॉल भी लगाए जाएंगे, जहां कलाकार क्रोशिया, लाख की चूड़ियां, चिकनकारी ब्लॉक, लहरिया दुपट्टा और पतंग बनाने की कला का प्रदर्शन करेंगे। युवाओं के लिए हेयर ब्रेडिंग का विशेष स्टॉल भी आकर्षण का केंद्र रहेगा।
फेस्टिवल की डायरेक्टर तस्वीर हसन ने बताया कि यह 17वां संस्करण उन कलाकारों, विद्वानों और कहानीकारों को एक मंच पर लाएगा, जिन्होंने लखनऊ और कोलकाता के बीच सांस्कृतिक यात्राएं की हैं। उन्होंने कहा कि इस बार इन जुड़ी हुई यादों को इनोवेटिव इंस्टॉलेशन और इमर्सिव प्रदर्शनियों के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा। पूरे दक्षिण एशिया से 100 से अधिक कारीगर अपनी विशिष्ट कलाओं के साथ हिस्सा लेंगे, जहां हर रचना अपनी विरासत और कहानी बयां करेगी।

