बैरिकेडिंग टूटने और हंगामे के बाद संगम क्षेत्र बना छावनी; धरने पर बैठे शंकराचार्य
हिरासत में 20 से अधिक साधु, अभद्रता का आरोप लगा शंकराचार्य ने त्यागा स्नान
प्रयागराज। मौनी अमावस्या के पावन पर्व पर तीर्थराज प्रयाग में उस समय तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई, जब पुलिस प्रशासन ने ज्योतिष पीठाधीश्वर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के रथ को संगम जाने से रोक दिया। शंकराचार्य अपने समर्थकों के साथ पारंपरिक स्नान की तर्ज पर यात्रा निकालकर संगम नोज की ओर बढ़ रहे थे, जिसे सुरक्षा कारणों से बीच रास्ते में ही थाम लिया गया।
प्रशासन द्वारा रथ रोके जाने पर शंकराचार्य के समर्थकों और पुलिस के बीच जबरदस्त धक्का-मुक्की हुई। देखते ही देखते पूरा संगम क्षेत्र पुलिस छावनी में तब्दील हो गया। पांटून पुल संख्या चार के पास आक्रोशित समर्थकों ने हंगामा किया, जिससे वहां लगी बैरिकेडिंग टूट गई। स्थिति को नियंत्रण में लेने के लिए पुलिस ने 20 से अधिक साधु-संतों को हिरासत में ले लिया।
प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था बनाम शंकराचार्य नाराजगी
गृह सचिव, मंडलायुक्त और पुलिस कमिश्नर समेत तमाम बड़े अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों का कहना था कि करोड़ों की भीड़ के बीच रथ और भारी लाव-लश्कर के साथ संगम जाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। पुलिस ने शंकराचार्य से केवल पांच लोगों के साथ जाकर स्नान करने का अनुरोध किया, जिसे उन्होंने ‘तानाशाही’ बताते हुए ठुकरा दिया। प्रशासन का तर्क था कि कोहरे और भीड़ के कारण भगदड़ मचने का खतरा था।
शंकराचार्य का स्नान त्याग और धरना
पुलिस के व्यवहार से क्षुब्ध होकर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने संगम स्नान करने से साफ मना कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी आंखों के सामने उनके साथ आए संतों को पीटा गया और उनके साथ अभद्रता की गई। शंकराचार्य ने कहा, “मान-अपमान से परे होने के बावजूद, मैं अपने साथियों के साथ हुए दुर्व्यवहार को बर्दाश्त नहीं कर सकता।”
वर्तमान में शंकराचार्य माघ मेले के त्रिवेणी मार्ग स्थित अपने शिविर में धरने पर बैठ गए हैं। उनके मीडिया प्रभारी के अनुसार, जब तक प्रशासन उन्हें ससम्मान प्रोटोकॉल के साथ नहीं ले जाएगा, वे गंगा स्नान नहीं करेंगे।
सीएम ऑफिस से निर्देश का इंतजार
मामला इतना बढ़ गया कि स्थानीय अधिकारी अब सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय से दिशा-निर्देश लेने का प्रयास कर रहे हैं। प्रशासन सीसीटीवी फुटेज की जांच कर रहा है ताकि बैरिकेडिंग तोड़ने और धक्का-मुक्की करने वालों पर कानूनी कार्रवाई की जा सके।

