भक्ति का अनूठा दृश्य दिखा: जब थिरक उठे कदम और गूँज उठे शंख
सनातन ध्वज वाहिका सपना गोयल की ओजस्वी अगुआई में निकली भव्य यात्रा
लखनऊ। शहर लखनऊ की पावन धरा आज उस समय आध्यात्मिक गौरव से दीप्तिमान हो उठी, जब हिंदू नव वर्ष के मंगल आगमन पर ‘ईश्वरीय स्वप्नाशीष सेवा समिति‘ द्वारा एक अभूतपूर्व शोभायात्रा निकाली गई। सनातन ध्वज वाहिका सपना गोयल की ओजस्वी अगुआई में निकली इस भव्य यात्रा ने न केवल परंपराओं का शंखनाद किया, बल्कि फूलों की वर्षा कर नव-उद्घाटित ‘ग्रीन कॉरिडोर’ का दिव्य अभिनंदन भी किया।
हनुमान सेतु से हजरतगंज स्थित गांधी प्रतिमा तक निकले इस ‘शक्ति लोक’ का दृश्य अत्यंत मनमोहक था। पीत वर्णी साड़ियों में सजी मातृशक्ति के हाथों में कहीं झांझ-मंजीरे थे, तो कहीं डमरू और धर्मध्वज की थपकी। वातावरण तब और भी जीवंत हो उठा जब नन्हे-मुन्ने बच्चे साक्षात देवी मां, अप्सरा और भारत माता के स्वरूप में सड़कों पर उतरे। डीजे पर बजते भक्तिमय भजनों और शंखध्वनि ने राहगीरों को ठहरने पर विवश कर दिया।
‘राष्ट्र प्रथम‘ का संकल्प और केसरिया हुंकार
इस शोभायात्रा का शुभारंभ विशिष्ट अतिथि और भारतीय संस्कृति के प्रखर उन्नायक संदीप बंसल ने केसरिया ध्वज दिखाकर किया। नारियल फोड़कर सर्वमंगल की कामना करते हुए उन्होंने उपस्थित जनसमूह को ‘राष्ट्र प्रथम‘ का संकल्प दिलाया। उन्होंने इस अवसर पर कहा कि “हिंदू नव वर्ष मात्र एक तिथि नहीं, बल्कि पूर्णतः वैज्ञानिक और गौरवशाली परंपरा है। सपना गोयल जी द्वारा संचालित ‘सुंदरकांड महाअभियान’ आज भारत वर्ष की नई पहचान बन रहा है।”

विश्व गुरु भारत की ओर बढ़ते कदम
अभियान की प्रणेता सपना गोयल ने इस उत्सव को शक्ति, साधना और अनुशासन का पर्व बताया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सुंदरकांड के आशीष से न केवल व्यक्ति का जीवन सुंदर बनेगा, बल्कि भारत पुनः ‘विश्व गुरु‘ के पद पर प्रतिष्ठित होगा। उल्लेखनीय है कि यह अभियान अयोध्या की जन्मभूमि से लेकर काशी, हरिद्वार और चित्रकूट तक अपनी आध्यात्मिक अलख जगा चुका है। बिना किसी सरकारी सहयोग के हज़ारों महिलाओं को जोड़कर किया जा रहा यह अनुष्ठान, सेवा और अध्यात्म का एक ऐसा सेतु बन गया है जहाँ जाड़ों में कंबल वितरण और सावन में कांवड़ सेवा जैसे पुनीत कार्य निरंतर जारी हैं।

