चारबाग पर रोकी गईं आशा कर्मी, वार्ता तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान
उप्र आशा वर्कर्स यूनियन के आह्वान पर हड़ताल के नौवें दिन विधान सभा मार्च
लखनऊ। उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन के आह्वान पर 15 दिसंबर से जारी हड़ताल के नौवें दिन मंगलवार को विधान सभा मार्च के दौरान राजधानी में आशा कर्मियों का भारी हुजूम उमड़ पड़ा। प्रदेश भर से पहुंचीं हजारों आशा कर्मियों ने प्रशासनिक दबाव, डराने-धमकाने और नेताओं को नजरबंद करने की कोशिशों के बावजूद सरकार के खिलाफ अपनी मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया।
सरकार से नाराज आशा कर्मियों को चारबाग रेलवे स्टेशन पर ही रोक दिया गया, जहां उन्होंने सभा कर विरोध दर्ज कराया। सभा को संबोधित करते हुए यूनियन की प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मी देवी ने कहा कि हड़ताल से घबराई सरकार दमन और उत्पीड़न का सहारा ले रही है। स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन द्वारा सेवा से बाहर करने की धमकियां दी जा रही हैं, लेकिन आशा कर्मी डरने वाली नहीं हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस बल का प्रयोग सरकार के असली चेहरे को उजागर करता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि दमन से आंदोलन खत्म नहीं होते, समस्याओं के समाधान से ही स्थिति सामान्य हो सकती है। सरकार यदि बातचीत को तैयार होती तो आशा कर्मियों को हड़ताल पर नहीं जाना पड़ता। यूनियन की राज्य सचिव अनीता वर्मा ने कहा कि यह संघर्ष वर्षों की उपेक्षा, नौकरशाही के अपमानजनक और शोषणकारी व्यवहार का परिणाम है। प्रदेश की लगभग दो लाख आशा संगिनियों की आवाज को सरकार को सुनना ही होगा।
आशा नेता जौली वैश्य ने सवाल उठाते हुए कहा कि 50 या 75 रुपये की मजदूरी में कोई भी मजदूर काम नहीं करेगा, लेकिन आशा कर्मियों को पिछले 20 वर्षों से इसी जानलेवा महंगाई में काम करने को मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 2,000 रुपये में पूरा महीना चलाना असंभव है, जबकि आशा कर्मी स्वास्थ्य विभाग के 72 से अधिक कार्यों का भार उठाती हैं।
इस दौरान भाकपा (माले) की केंद्रीय कमेटी सदस्य और अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन की प्रदेश अध्यक्ष कृष्णा अधिकारी ने बताया कि सरकार की ओर से वार्ता का प्रस्ताव आया, जिसके तहत 7 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल की मुख्यमंत्री के विशेष सचिव से बातचीत हुई। वार्ता के बाद प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मी देवी ने बताया कि सरकार ने मांगपत्र की मांगों को प्रथम दृष्टया जायज मानते हुए समाधान की दिशा में आगे बढ़ने का आश्वासन दिया है और अगले चरण की वार्ता की तिथि तय की जाएगी। कार्यक्रम के समापन पर यूनियन की राज्य सचिव ने स्पष्ट किया कि जब तक अगली वार्ता नहीं होती और ठोस निष्कर्ष नहीं निकलता, तब तक आशा कर्मियों की हड़ताल और आंदोलन जारी रहेगा।

