विज्ञानी नवाचार से पुष्पकृषि को मिल रही नई पहचान: दिनेश प्रताप सिंह

Anoop

December 21, 2025

वैज्ञानिक नवाचार से पुष्पकृषि को रोजगार व आजीविका का विकल्प, बागवान पुरस्कृत

गुलदाउदी-कोलियस प्रदर्शनी का समापन, आमजन और स्टूडेंट्स की रही सहभागिता

लखनऊ। सीएसआईआर–राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान (एनबीआरआई), लखनऊ में आयोजित दो दिवसीय वार्षिक गुलदाउदी एवं कोलियस प्रदर्शनी का आज भव्य समापन हुआ। प्रदर्शनी में आम नागरिक, विद्यार्थी, पादप-प्रेमी और महिलाएं बड़ी संख्या में शामिल हुईं। रंग-बिरंगे गुलदाउदी और कोलियस की विविध किस्मों ने सेंट्रल लॉन का वातावरण उल्लास और सौंदर्य से भर दिया।

प्रदेश के उद्यान, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार एवं कृषि निर्यात राज्यमंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि वैज्ञानिक नवाचार के माध्यम से प्रदेश और देश की पुष्पकृषि विरासत को संरक्षित और संवर्धित करने में संस्थान की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि इस तरह की प्रदर्शनी किसानों, उद्यमियों और युवाओं के लिए पुष्पकृषि को आजीविका का सशक्त विकल्प बनाती है। उन्होंने आमजन से आह्वान किया कि वे अपनी छतों पर सब्जी और पौधों की खेती अपनाएं, जिससे सकारात्मक ऊर्जा के साथ पोषणयुक्त ताजी सब्जियां भी उपलब्ध हों।

दो नवीन स्वदेशी गुलदाउदी किस्मों का विमोचन

दो नवीन स्वदेशी गुलदाउदी किस्मों ‘एनबीआरआई–मधुक्रम’ और ‘एनबीआरआई–शुक्र’ का औपचारिक विमोचन किया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि ये किस्में सौंदर्य, नवीनता और कृषक-अनुकूल गुणों का उत्कृष्ट संयोजन हैं, जो पुष्पकृषकों, नर्सरियों और सजावटी पौध उद्योग के लिए नए विकल्प प्रस्तुत करेंगी।

पुरस्कार वितरण और प्रमुख विजेता

समारोह की अध्यक्षता सीएसआईआर, नई दिल्ली के संयुक्त सचिव (प्रशासन) महेन्द्र कुमार गुप्ता ने की। इस अवसर पर 157 पुरस्कार वितरित किए गए, जिनमें 50 प्रथम, 55 द्वितीय और 52 तृतीय पुरस्कार शामिल हैं। निदेशक, सीएसआईआर–सीमैप, लखनऊ ने समग्र प्रदर्शन में प्रथम स्थान प्राप्त किया। छोटे और बड़े फूलों वाली ट्रॉफियाँ तथा ‘फ्लावर ऑफ द ईयर’ सहित अन्य प्रतिष्ठित पुरस्कार विजेताओं को प्रदान किए गए।

पुष्पकृषि आधारित अनुसंधान और ग्रामीण विकास पर प्रकाश

कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने पुष्पकृषि आधारित अनुसंधान, उद्यमिता और ग्रामीण विकास में प्रदर्शनी के महत्व को रेखांकित किया। कार्यक्रम का समापन शांतिपूर्ण और गरिमामय तरीके से हुआ।

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