लखनऊ में आज अप्रैल फूल के अवसर पर हंसी के ठहाकों का सैलाब उमड़ पड़ा
अखिल भारतीय सांस्कृतिक एवं साहित्यिक संस्था ‘रंगभारती’ का ‘घोंघाबसंत सम्मेलन’
लखनऊ। नवाबी नगरी लखनऊ में आज अप्रैल फूल के अवसर पर हंसी के ठहाकों का सैलाब उमड़ पड़ा। अवसर था अखिल भारतीय सांस्कृतिक एवं साहित्यिक संस्था ‘रंगभारती’ द्वारा आयोजित विश्व के सबसे पुराने हास्य-आयोजन ‘घोंघाबसंत सम्मेलन’ का। पिछले 65 वर्षों से अनवरत चली आ रही इस विलक्षण परंपरा ने इस बार भी रवीन्द्रालय के मंच पर धूम मचा दी।
आयोजन की शुरुआत हमेशा की तरह निराली रही। समाज की विसंगतियों पर कटाक्ष करते हुए सम्मेलन का उद्घाटन ‘मूर्खिस्तान के प्रधानमंत्री’ के रूप में एक गधे ने किया। वहीं, संस्था के अध्यक्ष और प्रख्यात साहित्यकार श्याम कुमार इस बार दूल्हे की वेशभूषा में अपने कमांडो और डुगडुगी-वादकों के साथ मंच पर उतरे, जिसे देखकर दर्शक लोटपोट हो गए। उनका अभिनंदन इटली के जूतों से बनी सुगंधित माला पहनाकर किया गया।

मुख्य अतिथि और विशिष्ट सम्मान
समारोह के मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री श्री ब्रजेश पाठक थे। उन्होंने श्याम कुमार जी के जीवट व्यक्तित्व की सराहना करते हुए कहा कि साधनों के अभाव के बावजूद ऐसी जीवंत परंपराओं को जीवित रखना समाजसेवा का उत्कृष्ट उदाहरण है। इस अवसर पर कई प्रतिष्ठित सम्मान भी प्रदान किए गए:
बेढब बनारसी रंगभारती सम्मान: लखनऊ के सूर्य कुमार पांडेय और वाराणसी के सांड़ बनारसी को दिया गया। रमई काका रंगभारती सम्मान: फतेहपुर के प्रसिद्ध अवधी कवि समीर शुक्ल को प्रदान किया गया। विशिष्ट अतिथियों में श्रीमती नम्रता पाठक, महंत देव्यागिरि और सुधीर हलवासिया सहित शहर की कई जानी-मानी हस्तियां मौजूद रहीं।

व्यंग्यात्मक उपहार और ‘कुम्भकर्ण’ सम्मान
सम्मेलन का मुख्य आकर्षण वे पुरस्कार और उपहार रहे जो व्यवस्था पर गहरा कटाक्ष करते हैं। उपमुख्यमंत्री की ओर से कवियों को ‘लॉलीपॉप’, महापौर की ओर से ‘राजमुकुट’ और जिलाधिकारी की ओर से ‘भिंडी व ककड़ी’ के जयमाल भेंट किए गए। वहीं, जनता के हितों की अनदेखी करने वाले विभागों को ‘कुम्भकर्ण सम्मान’ से नवाजा गया। इसमें लखनऊ नगर निगम (अतिक्रमण के लिए), एलडीए (अवैध कब्जों के लिए), बिजली विभाग, वन विभाग और मुख्यमंत्री पोर्टल के लापरवाह संचालकों को शामिल किया गया।
राष्ट्रीय ‘मूर्ख रत्न’ और ‘ढेंचू’ सम्मान
राजनीतिक जगत पर कटाक्ष करते हुए इस वर्ष भी कई नेताओं को ‘मूर्ख रत्न’ का राष्ट्रीय शिखर सम्मान घोषित किया गया, जिनमें नीतीश कुमार, डोनाल्ड ट्रम्प, स्टालिन और संजय सिंह जैसे नाम शामिल रहे। वहीं, अनर्गल बयानबाजी के लिए दिया जाने वाला प्रसिद्ध ‘ढेंचू’ सम्मान एक बार फिर राहुल गांधी के नाम रहा।

कवियों की महफिल
हास्य के इस महाकुंभ में सूर्य कुमार पांडेय, डंडा, डाॅ. ताराचंद ‘तनहा’, विनोद सिंह कलहंस और अरविंद झा जैसे दिग्गज कवियों ने अपनी रचनाओं से समां बांध दिया। श्याम कुमार जी ने अपनी प्रसिद्ध रचना ‘सरवा जाड़ा जाय रहा है’ के माध्यम से गर्मी के आने वाले कष्टों और बिजली-पानी की समस्या पर करारा व्यंग्य किया। अंत में, वरिष्ठ कलाकार पद्मा गिडवानी के सरस्वती वंदन और राजेंद्र विश्वकर्मा के चुटकुलों के साथ कार्यक्रम का विधिवत समापन हुआ। आज की तनावभरी जिंदगी में ‘घोंघाबसंत सम्मेलन’ ने एक बार फिर साबित कर दिया कि खिलखिलाकर हंसना ही सबसे बड़ी औषधि है।

