पंडित रोनू मजूमदार की बांसुरी, अशोक चक्रधर की कविताओं से सजा ‘जश्न-ए-अदब’
सांस्कृतिक उत्सव: सुरों की महफिल के बीच गूँजी ट्रांसजेंडर समुदाय के हक की बात
लखनऊ: राजधानी के गोमती नगर स्थित यूपी संगीत नाटक अकादमी के संत गाडगे जी महाराज ऑडिटोरियम में दो दिवसीय साहित्योत्सव ‘जश्न-ए-अदब‘ (कल्चरल कारवां) का शानदार शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम के पहले दिन कला और साहित्य के विभिन्न रंगों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। शाम की शुरुआत मशहूर गजल गायक शकील अहमद की मखमली आवाज के साथ हुई, जिन्होंने अपनी बेहतरीन प्रस्तुतियों से माहौल को रूहानी बना दिया।
संगीत के साथ-साथ समाज के गंभीर मुद्दों पर भी मंथन किया गया। ‘एक दुनिया ऐसी भी’ नामक चर्चा सत्र में महेंद्र भीष्म और अरुण सिंह ने ट्रांसजेंडर समुदाय के सामाजिक योगदान और उनके जीवन की चुनौतियों पर बेबाकी से अपनी राय रखी। इसके बाद मंच संभाला विख्यात कवि अशोक चक्रधर ने, जिनके सत्र ‘द व्हील ऑफ चक्रधर’ ने सभागार को ठहाकों से भर दिया। उन्होंने वसंत पर्व का स्वागत करते हुए देवी सरस्वती के स्वरूप और राजा रवि वर्मा की कलाकृतियों का जिक्र किया। साथ ही, उन्होंने पंचांग के महत्व को रेखांकित करते हुए जनवरी की कड़ाके की ठंड के बीच ‘पीली वसंत’ के आगमन का संदेश दिया।
गजल, कव्वाली और बांसुरी की धूम
दिन का मुख्य आकर्षण विश्व प्रसिद्ध बांसुरी वादक पंडित रोनू मजूमदार का वादन रहा। उन्होंने राग पूरिया से अपनी प्रस्तुति शुरू की और ‘अब कैसे बने तोरी बात सजन’ की धुन से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। देशभक्ति के रंग में सराबोर होते हुए उन्होंने राग देश में ‘वंदे मातरम’ और राग पीलू में ‘सारे जहाँ से अच्छा’ की सुरीली धुनें बिखेरीं। मंच पर ललित कुमार ने तबले पर सधी हुई संगति देकर इस संगीत संध्या को यादगार बना दिया।

