कहा— भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक शिक्षा एक-दूसरे की पूरक
चेतना-आधारित शिक्षा आज के वैश्विक तनावपूर्ण वातावरण में अत्यंत प्रासंगिक है
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल आज महर्षि महेश योगी रामायण विश्वविद्यालय, अयोध्या में आयोजित 35 फीट ऊँची भगवान श्रीराम की दिव्य प्रतिमा के अनावरण समारोह एवं भारतीय ज्ञान परंपरा आधारित शिक्षा संगोष्ठी में सम्मिलित हुईं। इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि भगवान श्रीराम की यह भव्य प्रतिमा स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण होने के साथ-साथ सत्य, धर्म, करुणा और कर्तव्य जैसे मानव जीवन के सर्वोच्च आदर्शों की जीवंत अभिव्यक्ति है।
उन्होंने कहा कि श्रीराम भारतीय सांस्कृतिक चेतना के केन्द्र हैं और उनका जीवन सुशासन, सामाजिक समरसता और नैतिक नेतृत्व के कालातीत आदर्श प्रस्तुत करता है।राज्यपाल ने कहा कि प्रभु श्रीराम का जीवन यह संदेश देता है कि सत्ता सेवा का माध्यम हो और निर्णय लोकमंगल से प्रेरित हों। आधुनिक विकास की दौड़ में मानवीय मूल्यों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिसे श्रीराम के आदर्श निरंतर स्मरण कराते हैं।
कार्यक्रम के दौरान डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, अयोध्या एवं महर्षि महेश योगी रामायण विश्वविद्यालय, अयोध्या के मध्य समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। राज्यपाल ने इसे महत्वपूर्ण पहल बताते हुए कहा कि यह अकादमिक सहयोग, संयुक्त शोध, अनुसंधान एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान को सुदृढ़ करेगा और अयोध्या को ज्ञान एवं संस्कृति के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने में सहायक होगा।
भारतीय ज्ञान परंपरा पर प्रकाश डालते हुए राज्यपाल ने कहा कि भारत की शिक्षा प्रणाली का उद्देश्य केवल रोजगार नहीं, बल्कि जीवन निर्माण रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक शिक्षा एक-दूसरे की विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं।राज्यपाल ने महर्षि महेश योगी जी के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि चेतना-आधारित शिक्षा आज के वैश्विक तनावपूर्ण वातावरण में अत्यंत प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप विश्वविद्यालय द्वारा भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक विषयों से जोड़ते हुए समग्र शिक्षा का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है।
राज्यपाल ने अयोध्या को रामराज्य के आदर्शों का शाश्वत प्रतीक बताते हुए युवाओं से आह्वान किया कि वे रामायण और महाभारत से प्रेरणा लेकर डिजिटल एवं तकनीकी माध्यमों से भारत की सांस्कृतिक सॉफ्ट पावर को वैश्विक स्तर पर स्थापित करें।कार्यक्रम में महापौर अयोध्या गिरीशपति त्रिपाठी, विधायक वेद प्रकाश गुप्ता, विश्वविद्यालय के कुलाधिपति अजय प्रकाश श्रीवास्तव, कुलपति प्रो. बी.पी. सिंह सहित अनेक गणमान्यजन, शिक्षक एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

