यह उलटबांसी का दौर, आज भूलने के विरुद्ध लड़ाई है: प्रो. प्रणय कृष्ण

Anoop

September 15, 2025

जसम की ओर से बलराज साहनी सभागार कैसरबाग में हुआ आयोजन

‘याद ए तश्ना आलमी’ पुस्तक विमोचन और हुआ कलाकृति का निर्माण

लखनऊ। लखनऊ के जानेमाने शायर तश्ना आलमी को याद किया गया। स्मृतिशेष तश्ना आलमी पर केंद्रित कार्यक्रम ‘याद ए तश्ना’ जन संस्कृति मंच (जसम) की ओर से कैसरबाग के अजीज स्मृति केंद्र के बलराज साहनी सभागार में हुआ। लखनऊ के विख्यात उर्दू शायर तश्ना आलमी पर केंद्रित शायरी की किताब ‘कलाम तश्ना’ का विमोचन कर कार्यक्रम की शुरुआत हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता जसम के राष्ट्रीय अध्यक्ष जानेमाने नाट्य निर्देशक नैनीताल से आए जहूर आलम ने की। उन्होंने तश्ना आलमी को याद करते हुए कहा कि यह अंधेरे का समय है। इसको चीर कर आगे बढ़ना होगा। शायर तश्ना आलमी का निधन सात वर्ष पहले हुआ था। उनके जीवन काल में एक किताब ‘बतकही’ प्रकाशित हो पाई थी।

‘विभाजनकारी संस्कृति और जन प्रतिरोध’ विषय पर प्रो. प्रणय कृष्ण ने कहा कि यह उलटबांसी का दौर है। स्मृतियों का गृह युद्ध चल रहा है। आज भूलने के विरुद्ध लड़ाई है। समाज को बांटने और नफरत फैलाने वाली शक्तियां हावी हैं । विचारों की स्वतंत्रता पर लगातार हमले हो रहे हैं। बिना मुकदमा चलाए लोकतंत्रवादियों को जेल में रखा गया है। सब कुछ पर कब्जा किया जा रहा है। इनके विरुद्ध संघर्ष भी हो रहा है। सपने ख़त्म नहीं किए जा सकते हैं। पाश ने कहा था कि सबसे ख़तरनाक होता है सपनों का मर जाना।

इलाहाबाद से आए उर्दू लेखक अनवार अब्बास ने ‘तरक्की पसंद तहरीक और आज का उर्दू अदब’ पर अपनी बात रखी। सुहेल वहीद ने ‘हमारा वक्त और उर्दू सहाफत’ इस विषय पर अपने ख्याल का इजहार किया और कहा कि उर्दू मिली-जुली रही है लेकिन आज वह मुसलमानों की होकर रह गई है। हिन्दी अखबारों में जिस तरह पूंजी का निवेश हुआ है, उर्दू अखबारों में नहीं हुआ है।

कार्यक्रम के शुरू में तस्वीर नक़वी ने पिछले 5 साल से जेल में बंद गुलफिशा फातिमा के प्रतिरोध की नज़्म सुनाई। उमर खालिद की मां ने जेल में बंद अपने बेटे से मिलने के बाद जिस टिप्पणी के जरिए जज्बात का इज़हार किया, जिसे भी तस्वीर नक़वी ने पेश किया। जनवादी गीतों की जोशभरी प्रस्तुति के जरिए कार्यक्रम का समापन हुआ। कार्यक्रम का संचालन जसम लखनऊ के सचिव फरजाना महदी ने किया। इस दौरान जसम से कौशल किशोर, इप्टा के राकेश समेत शहर के लेखक, बुद्धिजीवी और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद थे।

  • जानेमाने मूर्तिकार धर्मेंद्र ने कृतियां सृजित कर उठाए सवाल

इस मौके पर जन संस्कृति मंच लखनऊ के अध्यक्ष और जाने-माने कलाकार धर्मेंद्र कुमार का आज के हालात को व्यक्त करने वाला इंस्टॉलेशन कार्यक्रम के आकर्षण का केंद्र बना। कलाकृति का सृजन धर्मेंद्र कुमार के मार्गदर्शन में आर्ट्स कालेज में मूर्तिकला विभाग के स्टूडेंट्स अतुल, हेमंत और अनुराग ने किया। उन्होंने देश के मौजूदा हालातों पर आधारित अपनी कलाकृति के जरिए अभिव्यक्ति पर हो रहे हमलों के बाद उपजी स्थितियों को अभिव्यक्त किया।  

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