यहां दो स्वरूपों में विराजमान हैं भगवान विष्णु के उग्र रूप, जानें क्यों साल भर लगा रहता है चंदन का लेप?

Anoop

December 11, 2025

वैसे तो आपने भगवान विष्णु के कई मंदिरों के दर्शन किए होंगे लेकिन आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में भगवान विष्णु का एक ऐसा मंदिर हैं, जहां दो स्वरूपों की पूजा एक साथ की जाती है. साथ ही इन दोनों प्रतिमाओं पर चंदन का लेप लगाया जाता है. मान्यता है कि इस मंदिर में दर्शन करने मात्र से सभी इच्छाएं पूरी हो जाती है. आइए जानते हैं भगवान विष्णु के इस मंदिर के बारे में…

भगवान विष्णु ने समय-समय पर पृथ्वी को बचाने और राक्षसों का संहार करने के लिए अलग-अलग अवतार लिए हैं. आइए भगवान विष्णु के वराह और नरसिंह अवतार के बारे में जानते हैं. दोनों रूपों में भगवान विष्णु के अलग-अलग मंदिर भारत के अलग-अलग कोनों में मौजूद हैं, लेकिन विशाखापत्तनम में एक ऐसा मंदिर है, जहां भगवान विष्णु के संयुक्त रूप की पूजा होती है. यहां भगवान विष्णु के उग्र स्वरूप की पूजा अर्चना की जाती है और इस उग्र स्वरूप को शांत रखने के लिए प्रतीमा पर चंदन का लेप लगाया जाता है. मान्यता है कि इस मंदिर में दर्शन करने मात्र से सभी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं और सभी पाप नष्ट हो जाते हैं. आइए जानते हैं भगवान विष्णु के इस मंदिर के बारे में…

वराह और नरसिंह अवतार की संयुक्त रूप से पूजा
श्री वराह लक्ष्मी नरसिम्हा मंदिर आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में सिम्हाचलम पहाड़ी पर समुद्र तल से 800 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है. यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है, जिनके यहां वराह और नरसिंह अवतार की संयुक्त रूप से पूजा की जाती है. मंदिर में प्रतिमा को साल भर चंदन के लेप से ढका जाता है और सिर्फ अक्षय तृतीया के दिन ही उनका पूरा रूप देखने को मिलता है.

प्रतिमा पर लगाया जाता है चंदन का लेप
साल के बाकी दिन चंदन के लेप से ढके होने की वजह से प्रतिमा शिवलिंग के समान दिखती है. भगवान के बिना चंदन के रूप को ‘निजरूप दर्शन’ कहा जाता है, जिसके दर्शन साल में सिर्फ एक बार हो पाते हैं. प्रतिमा को चंदन के लेप से इसलिए ढका जाता है, क्योंकि भगवान का वराह और नरसिंह अवतार उग्र और भयंकर ऊर्जा से भरा है. उनकी ऊर्जा को संतुलित करने के लिए प्रतिमा पर रोजाना चंदन का लेप लगाया जाता है, जिससे भगवान को शीतलता मिले और वे शांत रूप में भक्तों को दर्शन दे सकें. प्रतिमा पर चंदन लगाने की प्रथा काफी सालों से चली आ रही है.

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