विजेता में जीत की आदत कभी खत्म नहीं होती; 2047 के विकसित भारत के निर्माण में सहायक होंगी प्रतिस्पर्धाएं: राज्यपाल
महन्त दिग्विजयनाथ की शिक्षाधर्मिता से विकसित हो रहा परिषद का विशाल शिक्षा तंत्र: मुख्यमंत्री
लखनऊ/गोरखपुर। महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक सप्ताह समारोह-2025 का समापन आज गोरखपुर में उत्तराखण्ड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में हुआ। इस अवसर पर विभिन्न शैक्षिक व सांस्कृतिक प्रतिस्पर्धाओं के विजेताओं को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि राज्यपाल गुरमीत सिंह ने कहा कि “एक विजेता की जीत की आदत कभी खत्म नहीं होती। जीवन में एक सफलता दूसरी सफलता को जन्म देती है, और यह उन्हीं को मिलती है, जिनमें साहस और निरंतरता की क्षमता होती है।” उन्होंने कहा कि परिषद द्वारा आयोजित प्रतिस्पर्धाएं वर्ष 2047 तक विकसित, आत्मनिर्भर और विश्वगुरु भारत के निर्माण में सहायक सिद्ध होंगी।
राज्यपाल ने गोरखपुर को साधना, संघर्ष, साहित्य और राष्ट्रनिष्ठा की भूमि बताते हुए कहा कि महायोगी गुरु गोरखनाथ ने इस क्षेत्र से सनातन चेतना को देशभर में प्रतिष्ठित किया। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की निडरता, निर्णायक नेतृत्व और प्रदेश को अपराधमुक्त बनाने के प्रयासों की सराहना की।
युवा शक्ति पर भरोसा, तकनीक को बताया भविष्य
राज्यपाल ने कहा कि भारत की 65% युवा आबादी उसे विश्व नेतृत्व की ओर ले जाएगी। भारत की ज्ञान परम्परा एआई, स्पेस टेक्नोलॉजी, नैनोटेक्नोलॉजी जैसी उभरती तकनीकों में वैश्विक बढ़त दिला सकती है। उन्होंने छात्रों को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति विकसित करने की प्रेरणा दी।
मुख्यमंत्री ने महन्त दिग्विजयनाथ की शिक्षा-सेवा परंपरा को किया नमन
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तराखण्ड के राज्यपाल के रूप में गुरमीत सिंह ने राज्य को शिक्षा, पर्यटन, पर्यावरण तथा कृषि के क्षेत्र में नई दिशा दी है। उन्होंने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि यह परिषद महन्त दिग्विजयनाथ की दूरदर्शिता और ‘गुरुभक्ति’ का परिणाम है।
सीएम ने बताया कि 1932 में परिषद की स्थापना,.1953-54 में महाराणा प्रताप महिला कॉलेज, 1956 में तकनीकी संस्थान की स्थापना, आज 50,000 से अधिक छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। सीएम योगी ने कहा कि गोरखपुर विश्वविद्यालय की स्थापना में परिषद की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जब अन्य संस्थान पीछे हट गए थे। परिषद ने अपनी संस्थाएं प्रदेश को देकर विश्वविद्यालय के निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया।
महापुरुषों के आदर्श प्रेरणा स्रोत: मुख्यमंत्री
सीएम ने कहा कि महाराणा प्रताप, शिवाजी और गुरु गोबिन्द सिंह जैसे महापुरुषों का स्मरण राष्ट्रीय संकटों में दिशा दिखाता है। महिला एवं तकनीकी शिक्षा के महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने दिग्विजयनाथ द्वारा महिला शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए किए गए प्रयासों की सराहना की।
युवाओं को नशा-मुक्त और तकनीक-समर्थ होने का आह्वान
मुख्यमंत्री ने कहा कि सफलता के लिए धैर्य, टीमवर्क और सकारात्मक सोच आवश्यक है। शार्टकट कभी सफलता नहीं दिलाता, तकनीक अवसर बढ़ाती है, कम नहीं करती ।युवाओं को ड्रग्स और मोबाइल के अत्यधिक उपयोग से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज की दुनिया एआई, आईओटी, ड्रोन, और रोबोटिक्स के युग में प्रवेश कर चुकी है, और अकादमिक संस्थानों को इन चुनौतियों व अवसरों के लिए तैयार रहना होगा। समारोह में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं, शिक्षक, जनप्रतिनिधि व परिषद के पदाधिकारी उपस्थित रहे।

